सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल पर्यटन निगम कर्मियों के लिए आई खुशखबरी

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गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल प्रदेश पर्यटन निगम के कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। पेंशन से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्मियों व पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए इस संदर्भ में हाईकोर्ट की खंडपीठ की तरफ से पारित फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही हाईकोर्ट की एकल पीठ के फैसले पर अपनी मुहर लगाई है। मामला भविष्य निधि से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आने के बाद से निगम कर्मियों को पहले के मुकाबले बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। ये राशि एक हजार रुपए से तीस हजार रुपए तक होगी पहले उन्हें महज एक हजार रुपए से लेकर तीन हजार रुपए ही पेंशन मिलती थी।

इस संदर्भ में दाखिल की गई याचिका के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पर्यटन निगम की स्थापना के बाद से ही निगम प्रबंधन अपने कर्मचारियों की बेसिकपेमेंट व डीए की कुल राशि का 10 फीसदी तथा 12 फीसदी हिस्सा काटता रहा है। इसके अलावा निगम इतना ही हिस्सा नियोक्ता अंशदान के तौर पर भविष्य निधि में जमा करवाता रहा है। तथ्यों के मुताबिक 16 नवंबर 1995 से भविष्य निधि संगठन ने अपने अंशधारकों के लिए एक पेंशन स्कीम शुरू की। इस स्कीम के तहत यह प्रावधान था कि कर्मचारी और नियोक्ता इस योजना में नियोक्ता के अंशदानमें से कर्मचारी के मूल वेतन और महगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी या 5000 रूपए में से अधिकतम का 8.33 फीसदी हिस्सा ही इस फंड मे जमा करवा सकता था। इसे बाद में 6500 रूपए व पंद्रह हजार रुपए किया गया।
जो कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं और बढ़ी हुई पेंशन लेना चाहते हैं, वे संबंधित विभाग से अपना मामला उठा सकते हैं।

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