कंडोल के नराता राम के हाथों का हुनर पत्थर की प्रतिमाओं में जान डाल देता

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बद्दी औद्योगिक क्षेत्र के साथ लगते पहाड़ी क्षेत्र हरीपुर के साथ सटे गांव कंडोल के नराता राम के हाथों का हुनर पत्थर की प्रतिमाओं में जान डाल देता है। durgamaa1_2015_10_11_151458 नराता राम के हाथों का हुनर व जुनून को उसके पारिवार के माली हालात भी प्रभावित नही कर सके और जीवन में उसने मूर्तियों को तराशने का सिलसिला जारी रखा और यही वजह है कि आज उसने हिमाचल, पंजाब व हरियाणा में मां शेरांवाली, शिवशंकर, हनुमान, सांई बाबा, भैरोंनाथ, बाबा बालक नाथ आदि अनेक देवी देवताओं की मूर्तियां तराश कर भेज चुके हैं।

नराता राम ने बताया कि पहले वे अपने पिता अमर लाल के साथ मन्दिर व मकान बनाने का काम करते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई मन्दिरों का भी निर्माण किया है लेकिन एकाएक उनके मन में मूर्तियां बनाने का जिज्ञासा पैदा हुई और हाथों की मेहनत के बल पर उसे कामयाबी मिली और एक के बाद एक मूर्तियों को तराशने का सिलसिला जारी हो गया। आज उसके इस काम में उसके तीन पुत्र भी उसके काम में हाथ बंटा रहे हैं। उसने बताया कि घर की गरीबी व संसाधनों की कमी को उसने अपने हुनर पर भारी नहीं पडऩे दिया।

बस एक दी रंज : उन्हें बस एक ही रंज है कि उनके हुनर को भले ही स्थानीय लोगों और बाहरी प्रदेशों में सराहना मिली है लेकिन प्रदेश सरकार ने उनकी कला को कोई सम्मान नहीं दिया है। अगर सरकार उनकी कला को परखे तो वे धरोहरों को सहेजने में सरकार को सहयोग दे सकते हैं।

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