ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी का सोलन में दु:ख निवारण समागम

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ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी के सान्निध्य में आज व कल 16 व 17 नवंबर को पुलिस लाइन ग्राउंड में दो दिन का भव्य प्रभु कृपा दु:ख निवारण समागम आयोजित किया जा रहा है।

देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालू समागम में कुमार स्वामी जी से मां भगवती के वे अद्भुत रहस्य ग्रहण करेंगे, जिसके करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दु:खों का तत्क्षण निवारण होता है।

सोलन में होने वाले समागम को लेकर उत्साह का माहौल है। समागम के दौरान अनेक प्रकार की जनकल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। समागम में राजनीतिक, सामाजिक और कला जगत के गणमान्य लोग भी प्रभु कृपा ग्रहण करने सोलन पधार रहे हैं।

भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धम के महासचिव श्री गुरुदास ने बताया कि ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रभु कृपा नाम पाठ को पूरे विश्व में मान्यता मिल रही है। न्यूजर्सी स्टेट सीनेट ने ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी को अपने सदन में बुलाकर विशेष रूप से प्रस्ताव पारित कर सम्मानित किया। इससे पूर्व इन्हें न्यूयार्क स्टेट सीनेट ने भी निर्विरोध प्रस्ताव पारित कर सम्मानित किया था।

जनकल्याण और विश्व शांति के क्षेत्रों में अविस्मरणीय कार्य करने के लिए ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी को ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में ‘अंबेसडर फॉर पीसÓ अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी भी ब्रह्मषि श्री कुमार स्वामी जी से मां भगवती का विशेष पाठ ग्रहण कर चुके हैं।

श्री गुरुदास ने बताया कि ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रभु कृपा नाम पाठ को लाखों-करोड़ों भाई-बहन नियमित रूप से कर रहे हैं। प्रभु कृपा नाम पाठ के मेडिकल प्रमाणों और अनुभवों को देखकर विश्व के बुद्धिजीवी, डाक्टर और वैज्ञानिक हैरान हैं। विश्व के जो लोग पाठ-पूजा को नहीं मानते थे, वे लोग आज नियमित रूप से न केवल प्रभु कृपा नाम पाठ कर रहे हैं, अपितु धर्म शास्त्रों का सम्मान भी कर रहे हैं।

श्री गुरुदास ने बताया कि ब्रह्मषि श्री कुमार स्वामी जी द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रभु कृपा नाम पाठ अत्यंत सरल और सहज है, जिसे किसी धर्म, संप्रदाय और मत का व्यक्ति सहजता से प्राप्त कर सकता है। यह पाठ पूर्णत: नि:शुल्क है और कोई भी भाई-बहन इसे समागम में आकर प्राप्त कर सकता है। यह पाठ किसी व्यक्ति का न होकर पूर्णत: शास्त्रों का है।

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