भारत का पुराना इनकम टैक्स एक्ट 1961 खत्म हो रहा है। नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। सरकार ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। ITR फॉर्म्स सरल और डिजिटल बनेंगे। पब्लिक फीडबैक 22 फरवरी तक मांगा गया है।

ITR-1 से ITR-7 के नाम वही रहेंगे, लेकिन नियम सख्त और साफ होंगे। फॉर्म्स स्मार्ट बनेंगे – प्री-फिल्ड डेटा, ऑटोमेटेड मैचिंग और स्टैंडर्ड जानकारी से भरना आसान होगा। डिजिटल फाइलिंग डिफॉल्ट होगी, पेपर सिर्फ 80+ उम्र वालों के लिए।

ITR-1 (सहज) सैलरी, एक घर की प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट इनकम वालों के लिए रहेगा। सिम्पल केस में बेस्ट ऑप्शन। लेकिन अगर कुछ एक्स्ट्रा हुआ तो ITR-2 जाना पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा।

ITR-2 कैपिटल गेंस, कई घरों या विदेशी इनकम वालों के लिए है। नए नियम में ITR-1 क्वालीफाई न करने पर डिफॉल्ट ITR-2। डिस्क्लोजर ज्यादा डिटेल्ड होंगे। निवेशकों को ज्यादा जानकारी देनी होगी। 

ITR-3 बिजनेस या प्रोफेशन इनकम वालों के लिए। प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन न होने पर ITR-3 भरना होगा। पर्क्विजिट्स, कैपिटल गेंस पर ज्यादा फोकस। ज्यादा जानकारी शेयर करनी पड़ेगी।

ITR-4 अब सीमित रहेगा। विदेशी एसेट, डायरेक्टर, 50 लाख+ इनकम, दो+ घर, अनलिस्टेड शेयर वाले बाहर। कई छोटे कारोबारी ITR-3 की ओर जाएंगे। सुगम अब हर किसी के लिए नहीं।

ITR-5 फर्म्स/LLP के लिए, ITR-6 कंपनियों के लिए। डिजिटल सिग्नेचर जरूरी। ITR-7 ट्रस्ट्स के लिए – ऑडिट, डोनेशन डिटेल्स सख्त। देर से फाइलिंग पर छूट प्रभावित हो सकती है।

नए ड्राफ्ट रूल्स से ITR फाइलिंग डिजिटल, सरल लेकिन सख्त हो जाएगी। आसान फॉर्म्स सीमित, डिस्क्लोजर ज्यादा। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने पर टैक्सपेयर्स को ज्यादा जानकारी देनी होगी। फीडबैक दें और स्मार्ट तरीके से तैयार रहें – कंप्लायंस आसान बनेगा!