अंतिम लेख : जब प्रथमिकता नहीं होती तो नज़रअंदाज़ होना लाजमी

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!
तृप्ता भाटिया

अंतिम लेख : जब प्रथमिकता नहीं होती तो नज़रअंदाज़ होना लाजमी है, फिर भी ज़िन्दगी खूबसूरत है। ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है कभी इतने मत हार जाना की बोझ लगने लगे! नहीं मिलेंगे नतीजे कभी मेहनत के अनुसार पर थक कर बैठ मत जाना! खुद से खुद ही प्यार करना सीख लेना दुनिया मतलबी है! यह वही नब्ज दबा देती जो दर्द करती है! अच्छा होना किसी परिस्थिति के लिए अच्छा हो सकता है और बड़ा होना बड़ी बात है। कोशिश करना किसी के बुरे वक्त में काम आ सको, अच्छे वक़्त में तो बेगाने भी अपने बन ही जाते हैं! दुनिया के शोरगुल में किसी को नज़रअंदाज़ मत करना हो सकता है जिसने याद किया हो उसकी आखरी उम्मीद हो तुम या फिर आखिर गुफ्तगू। मन में अच्छे विचार सब के लिए रखना, कभी -,कभी सोचा हुआ अचानक से सच हो जाता है! बड़े लोगों से मिलनाजुलना जरूर रखना किसी छोटे की बात मत टालना दुआओं से दामन यही भरते हैं वरना बड़े तो ये सोचकर भी परवाह नहीं करते कि इसके जैसे बहुत हैं! ज़िन्दगी गम नज़रअंदाज़ करके और खुशियां समेट कर जी भर के जियो, एक ही पल में ये सोचकर कि यह अंतिम ही था! अगर में निजी अनुभव बताऊं तो फेसबुक से इंसान की मानसिकता का अंदाज़ा बड़ी आसानी से लगया जा सकता है। अच्छे लोगों को पढ़े सुने उन्हें फॉलो करें। रोज़ जोक पोस्ट करने वाले निजी जिंदगी में न बहुत खुश हैं न इतने बेरोज़गार! बस कुछ लोग मेरी तरह पढ़ने और तनावग्रस्त दुनिया को थोड़ा हंसाने आ जाते हैं। सचे मित्र सिर्फ बचपन मे मिलते हैं, उसके बाद तो हम जरूरतों के हिसाब से बात करना सीख जाते हैं और एक उम्र में आकर तो कैलकुलेटर ही हो जाते हैं, किसका फोन सुनना है, किसको रिप्लाई करना है! ये सब प्राथमिकता की समय सारणी के हिसाब से करते हैं! ऐसा नहीं है दुनिया अच्छे लोगों से भरी पड़ी है पर कभी-कभी जिन लोगों का अनुभव ज्यादा होता है वो दिमाग मे छाप छोड़ जाते हैं! लोग हमें सब एक जैसे ही लगते हैं!अच्छा इंसान बनने के लिये बड़ा आदमी बनना कोई जरूरी नहीं है! बड़ा होने पर अच्छा बने रहना महानता है! अब यह मुझे philosophy लगती है, इस दुनिया में भरोसा नफरत प्यार सबको सब औकात के हिसाब से देते हैं। यकीन मानिये जब आप सौतेले रिश्तों में हों तो कुछ भी कर लीजिए किसी से मिलवाने से पहले यही बोला जाता है सगे नहीं हैं पर सगे जैसे हैं। कोई उधार आपको आपकी क्षमता देखर हाँ या न देने में करेगा। आपके अंकल आंटी कितना ही प्यार क्यों न करते हों रात को उठकर वो यह चेक करने कभी नहीं आएंगे की आपकी रजाई नीचे गिरी है या नहीं जैसे अमूमन वो अपने बच्चों की निगरानी करते हैं। आपके अपने दोस्त एक दिन आपको एहसास करवा देंगे कि जब वो किसी ओहदे पर होंगे और आप नाकामयाब। यकीन मानिये आप तेज़ बुखार में हों तो सिर्फ आपकी माँ का माथा चूमना ही आपको राहत दे सकता , आप सिर्फ अपने पापा को यार पापा बोलकर भी कोई चीज़ लेने की जिद्द कर सकते हैं दूसरों से तो आपको अपना फट्टा हुआ जुता और टूट हुआ दिल भी छुपाना पड़ता है। भगवान भी किस्मत लिखते लिखते शायद थक जाता होगा जब उसे नींद आने लगी होगी..तो उसने एक कप चाय पी होगी…और पेन को किताब के सहारे रखा होगा…वो पेन जिसका ढक्कन उसने पहले ही खो दिया होगा…वो पेन लुढकते लुढकते जमीन पे गिर गया होगा… शायद 10 में से 8 बार वो पेन पूरी तरह ठीक रहता हो…लेकिन मेरा नसीब तो बचे हुए 2 बार जैसा है ना… वो पेन का पॉइंट थोडा सा खराब हो गया होगा…और उसने आलस में आ के रिफिल नही बदली होगी…वो लिखता रहा होगा उसी खराब पॉइंट वाले पेन से…और लिख दी होगी किस्मत… उसकी लिखी हुई बातें,जिन पर स्याही नही हैं… वो नसीब में, होकर भी नही हैं… दूसरों से आपको नफरत तो क्या प्यार भी छुपाना पड़ता है कहीं यह न बोल दे कि औकात देखी है अपनी छुपाईये अपनी फीलिंग्स यही सही रहेगा, किसी की बातों के तमाचे से टूट जाने से ठीक है। ज़िन्दगी रीटेक नहीं देती और मौत मौहलत, कॉन्टेक्ट्स नंबर की लिस्ट चाहे जितनी मर्ज़ी लम्बी हो जो दिल में होंगे या तो उनसे आप ब्लॉक होंगे या नज़रअंदाज़। प्राथमिकता ही अबको स्पेशल बनाती है वरना इंसान तो सारे ही हैं। कभी-कभी खामोश रहना बेहतर है, और दूर हो जाना उनकी नज़रों से जो आपको नज़रअंदाज़ करे। ✍️🙏🏻