थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं।

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!
तृप्ता भाटिया

थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं। यह बात मैंने सिर्फ कुछ दिनों में महसूस की है। मुझे बड़ा होना, छोटा होना कभी लगता ही नहीं था, मुझे बस इतना लगता था जिसका कद बड़ा होता होगा वो झुक कर मिलता है।

जब से होश संभाला है,बहुत सारी चीजें सीखी है,बहुत कुछ महसूस किया है , कितनी ही सारी असाधारण घटनाये बहुत ही कम उम्र में होती देखी है, किसी की जिंदा जिंदगी भी देखी है, ओर किसी अपने बहुत करीबी को अपने सामने चिता पे जलते हुए भी देखा है, हर चीज के बारे में अपनी एक सोच , एक धारना खुद ब खुद बनती चली गयी , खास कर की एक अच्छी जिंदगी कैसी होती है? इसका एक अलग ही ढांचा बना कर रख लिया था मन मे ,
कई बार खुद को उन मापदंडो पे खरा न उतर पाने का अफसोस भी हुआ ,
हर बार यही लगा कि वो जो एक लकीर खिंच रखी है , उसे छूना ही सफलता है, वही जिंदगी है, वहीं खुशियों का खजाना है ।
पर नही, जो भी सोच रखा था , जो कुछ भी मान रखा था , जो धारणाये अपने अंदर बना रखी थी , जिसके कारण न जाने कितनी ही बार खुद से खुद को जलील किया होगा, वो सब कुछ , हर एक चीज, हर एक सीख , हर सोच सिर्फ और सिर्फ हमारा भ्रम है और कुछ नही, कुछ भी नही ।
जिंदगी हमारी सोच से बिल्कुल परे है , हमारी समझ से बहुत अलग ।
जलील करने के लिए दुनिया बड़ी है, कभी-कभी तो दोस्त भी कर देते हैं या शायद हम उंन्हे दोस्त समझने की गलती कर देते हैं।
बजुर्ग सही बोलते थे दोस्ती रिस्तेदारी बराबर वालों में ही अच्छी लगती है, अगर आप अच्छे भी हैं तो ज्यादा जरूरी नहीं है, कभी-कभी बस कुछ सीने में चुभता सा रहता है।
खुद को ही एहमियत दूँ तो भी लोग बुरा मान जाते हैं और लोगों को दें तो उनको बेले से आवारा कुते जैसे लगते धन्य शायद यह भी सोचते हैं इसको क्या चाहिए होगा?अनकंडीशनल लव जैसा कुछ नहीं होता , क्योंकि हो भी तो दुनिया का नज़रिया नहीं बदल सकते ।
अपने ही ख्यालों में कभी हंसी तो कभी आंसू गालों तक आ जाते हैं ।
तृप्ता भाटिया