मंत्री बनने के बाद विक्रमादित्य सिंह के बदले सुर, बोले “हम डाकिया नहीं हैं”

प्रजासत्ता ब्यूरो|
सुक्खू सरकार के कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह सोशल मीडिया पर अपनी राय को बेबाक से रखने के लिए जानें जाते हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं, हालांकि कभी-कभी वह अपनी पोस्टों और कमेन्टस को लेकर ट्रोलर्स के बीच काफी ट्रोल होते हैं। ताजा मामले में उनका एक कमेंट सुर्खियां बटोर रहा है जो काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

दरअसल मंगलवार शाम को मंत्री विक्रमादित्य ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। जिसमे शिमला ग्रामीण में सड़कों की टायरिंग की कुछ तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर शेयर की गई थी। इस पर पोस्ट पर लोगों ने खूब कमेंट किए। लेकिन इसमें एक ऐसा कमेंट था, जो कि चर्चा का विषय़ बन हुआ है। किसी यूर्जर ने उस कमेंट का स्क्रीन शॉट लिया और यह स्क्रीन शॉट वायरल हो गया है और यह मसला अब सुर्खियां बटोर रहा है।

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बता दें कि एक शख्स ने जब मंत्री विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट पर हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों के पेंडिंग रिजल्ट को लेकर “मुख्यमंत्री को बोलिये, रिजल्ट दीजिए”…. का कमेंट किया तो कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी जवाब देते हुए यूजर ने कमेंट में लिखा कि, “हम डाकिया नहीं हैं”…. इसके बाद से ही कैबिनेट मंत्री का इस तरह का जवाब लोगों के गले नहीं उतर रहा है। सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा इस स्क्रीन शॉट को शेयर कर अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है। भाजपा की टीम ने भी मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। फेसबुक पर लोग भी विक्रमादित्य सिंह को खूब खरी खोटी सुना रहे है।

उल्लेखनीय है कि पुर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के कारण उनके परिवार और बेटे को हिमाचल की जनता द्वारा काफी तवज्जो दी जाती है। कई बार तो खुद विक्रमादित्य सिंह भी ऐसी पोस्ट डाल कर यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वह जनता के सच्चे हितेषी है और खुद को जमीन से जुडा हुआ बतातें है। हालांकि प्रदेश में एक वर्ग ऐसा भी है जो उन्हें राजसी परिवार का होने के चलते उन्हें राजा की भूमिका में देखता हैं। इसी के चलते विक्रमादित्य सिंह भी चुनाव से पहले और बाद में कई मंचों पर जनता और युवाओं की आवाज़ को उठाने की बात कहते रहें है।

लेकिन मंत्री पद मिलने के कुछ महीनो बाद ही उनके सुर बदलने शुरू हो चुके हैं। युवाओं की समस्याओं को उठाने के बदले उनके कथन के अनुसार “हम डाकिया नहीं हैं”… राजा की भूमिका में उनका डाकिया बनना शायद उन्हें ही सही न लग रहा हो। हालांकि आम जनता और युवाओं को अभी भी उनसे बड़ी उम्मीदें है कि वह उनकी समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाएंगे और हल करवाएंगे। क्योंकि उन्होंने तो इसी मुद्दे पर उन्हें वोट देकर इस पद तक पहुँचाया है। बहरहाल विक्रमादित्य सिंह अपने इस कमेट को लेकर क्या स्टेंड लेते हैं यह आने वाला वक्त ही बतायेगा, लेकिन उनका यह अंदाज जनता को रास नही आ रहा है।