इसी दिन होगी नगर निगम पार्षदों की शपथ और महापौर व उपमहापौर का चुनाव

हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों धर्मशाला, मंडी, सोलन और पालमपुर में बुधवार को वोट डाले गए. इस चुनाव में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है. बीजेपी ने एक में जीत दर्ज की है और एक में आगे रही
हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों धर्मशाला, मंडी, सोलन और पालमपुर में बुधवार को वोट डाले गए. इस चुनाव में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है. बीजेपी ने एक में जीत दर्ज की है और एक में आगे रही

प्रजासत्ता|
हिमाचल प्रदेश में बुधवार को चार नगर निगमों व छह नगर पंचायतों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नतीजे भी सामने आ चुके हैं। कांग्रेस ने सोलन और पालमपुर नगर निगमों पर कब्जा कर लिया है, जबकि भाजपा मंडी में ही पूर्ण बहुमत हासिल कर पाई, जबकि धर्मशाला में सबसे बड़ी पार्टी बनी है| चुनाव समाप्त होने के बाद अब यहाँ पर आदर्श चुनाव आचार संहिता भी समाप्त हो गई है।

अब नए पार्षद, महापौर व उपमहापौर समेत नई नगर पंचायतों के पार्षद 13 अप्रैल को शपथ ग्रहण करेंगे। महापौर व उपमहापौर का चुनाव उसी दिन होगा। इसके लिए कोरम तीन चौथाई का होना जरूरी है, फिर चाहे किसी भी दल का बहुमत हो। यदि कोरम नहीं होता है तो उस दिन चयन नहीं हो सकेगा। लिहाजा फिर तीन दिन का समय दिया जाएगा। तीन दिन के बाद होने वाली बैठक में फिर कोरम की जरूरत नहीं होगी। यानि 13 अप्रैल को जहां पर महापौर व उपमहापौर का चुनाव नहीं हो पाया तो वहां 17 अप्रैल को दूसरी बैठक में अनिवार्य तौर पर चुनाव होगा।

बुधवार को शिमला में राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों की बैठक हुई। वहीं शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के साथ भी इसकी चर्चा हुई है, जिनको वीरवार को अधिसूचना जारी करनी है।

बता दें कि पालमपुर और सोलन में हुए मतदान में कांग्रेस ने प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी को चौंका दिया है| वहीँ भाजपा मंडी में ही पूर्ण बहुमत हासिल कर पाई, जबकि धर्मशाला में सबसे बड़ी पार्टी बनी है| ऐसे में कांग्रेस और भाजपा में धर्मशाला नगर निगम में महापौर व उपमहापौर के लिए काफी जदोजहत करनी पद सकती है|

धर्मशाला में भी भाजपा आठ सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है| यहां वह बहुमत से एक सीट पीछे रह गई| यहां पर चार आजाद उम्मीदवार विजयी रहे हैं, जिनमें से दो कांग्रेस के बागी हैं| यहां भाजपा सत्ता संभाल सकती है, उसे सिर्फ एक पार्षद चाहिए| जबकि कांग्रेस को बागियों से पार पाना आसान नहीं है| सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे यह चुनाव भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हुए हैं|