प्रशासनिक निर्देशों पर भारी पड़ी देव आस्था, देवलूओं की भीड़ ने पुलिस दल को भगाया

प्रशासनिक निर्देशों पर भारी पड़ी देव आस्था, देवलूओं की भीड़ ने पुलिस दल को भगाया

प्रजासत्ता |
कोरोना वायरस का हवाला देकर दशकों पुरानी देव आस्था को स्थगित करने का भले ही स्थानीय प्रशासन ने निर्णय लिया हो, लेकिन प्रशासन के निर्देशों पर देव आस्था भारी पड़ी है। बता दें कि देवभूमि में आस्था के आगे व्यवस्था धड़ाम हो गई है। ताज़ा मामला जिला कुल्लू घाटी के विश्व धरोहर गांव नग्गर का है|

प्रशासनिक निर्देशों पर भारी पड़ी देव आस्था, देवलूओं की भीड़ ने पुलिस दल को भगाया

गांव नग्गर में उस समय एक परिदृश्य सामने आया जब वहां पर पुलिस दल को देवताओं ने भगाया। वीरवार शाम के समय जब देवी-देवताओं के देवकार्य में उपस्थित हुए देवलुओं की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस दल पहुंचा। इस पर देवता उग्र हो गए और उन्हें वहां से भागने पर मजबूर होना पड़ा।

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बता दें कि हर वर्ष नग्गर में माता त्रिपूरा सुंदरी के प्रांगण में छह दिवसीय शाढ़ी जाच का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह जातर मेला 18 से 24 मई तक मनाया जा रहा है। वीरवार को जाच के तीसरे दिन जब नग्गर क्षेत्र के तीन देवी देवता माता पटंति, माता त्रिपूरा सुंदरी व नाग देवता एक सुक्ष्म देवकार्य के लिए एकत्रित हुए तो वहां पर देवलुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तीनो देवी देवताओं को पुलिस इस कार्यवाही पर एतराज हुआ और सभी देवता उग्र हो गए जिससे पुलिस दल से वहां से भागने पर मजबूर होना।

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हालांकि एक बार तो पुलिस वहां से चली गई मगर दूसरी बार पुन: भीड़ को देखा तो उन्हें उल्टे पांव वहां से जाना पड़ा। कोरोना काल के चलते सामाजिक दूरी, मास्क पहनना जहां जरूरी हैं लेकिन देवी-देवताओं ने पूलिस की कार्यवाही पर एतराज जताया। गौर रहे कि नग्गर में जहां शाढ़ी जाच को लेकर देवकार्य चला वहीं पर वायरल वीडियों की क्षेत्र में बड़ी चर्चा है।

गौर हो कि इस पुरे मामले में प्रशासन के कोरोना गाइड लाइन का हवाला देते हुए तमाम प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद आस्था कोरोना के डर पर भारी पड़ी| वहीं देवी-देवताओं के पुजारियों का दावा है कि देवताओं को पुलिस की कार्रवाई पर एतराज है। हालांकि कुछ लोग इस घटना के लिए आलोचना भी कर रहे है कि यह धार्मिक कार्य सिर्फ देवताओं के पुजारियों और चंद देवलुओं के साथ हो सकता था, इसके लिए भीड़ जुटाने की जरूरत नहीं थी, आस्था और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। ऐसे समय में जब कोरोना पुरे देश में कहर मचा रहा है तो उसकी चेन को तौड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड रोकनेके लिए जारी एसओपी का पालन करना और करवाना भी जरुर है|

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