MBU बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामला: आरोपियों की कुछ और संपत्ति को भी अटैच कर सकती है ईडी

हिमाचल प्रदेश में बहुचर्चित फर्जी डिग्री (Fake Degree Scam) मामले

प्रजासत्ता |
हिमाचल प्रदेश में बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और मामले के मुख्य आरोपी राजकुमार राणा और उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ सकती है| सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जल्द ही आरोपितों की कुछ और संपत्ति भी अटैच कर सकता है।

बता दें कि सोलन जिले में 2009 में स्थापित हुई मानव भारती यूनिवर्सिटी ने 11 सालों के भीतर करीब 440 करोड़ की संपत्ति खड़ी की| ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और मामले के मुख्य आरोपी राजकुमार राणा और उसके परिवार वालों की हिमाचल और राजस्थान स्थित 194.17 करोड़ रू. की चल-अचल संपत्ति को पहले ही अटैच किया था| अब सीआइडी की एसआइटी एक और एफआइआर दर्ज करने की तैयारी में है।

जांच से पता चला है कि सोलन के सुल्तानपुर स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय की 30 बीघा जमीन मुख्य आरोपित राणा की पत्नी के नाम है। उस महिला से यह जमीन विवि को लीज पर दी गई है। इसकी एवज में प्रतिमाह 50 हजार रुपये कमाई होती है। सिरमौर के पच्छाद के कुन्हूट में विवि की सौ बीघा जमीन है। इसमें से 45 बीघा पत्नी के नाम पर है, जबकि कानूनन विवि की जमीन ट्रस्ट के नाम होनी चाहिए थी। राजस्थान के माधव विश्वविद्यालय के लिए वहां की सरकार से करीब सौ बीघा जमीन लीज पर ले रखी है। कुछ जमीन वहां भी राणा के बेटे के नाम पर खरीदी गई है। इस जमीन को भी परिवार के नाम के चल रहे विश्वविद्यालय को लीज पर दे रखा है।

इसे भी पढ़ें:  बद्दी की फार्मा कंपनी में चंडीगढ़ पुलिस की दबिश, रेमडेसिविर के 3 हजार इंजेक्शन भी बरामद

बता दें साल 2020 की शुरूआत में सबसे पहले इस बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले का पर्दाफाश हुआ था, जिसके बाद सरकार ने इस पर जांच बिठाई और जांच का जिम्मा एसआईटी को सौंपा| इस मामले में मानव भारती के मामले में लगभग 275 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई| जिनमें मुख्य आरोपी राजकुमार राणा समेत कुल 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 2 आरोपी न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं| इस मामले में ईडी ने जो संपत्ति अटैच की है उनमें राज कुमार राणा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज करीब 186 करोड़ रुपये की जमीन, रिहायशी घरों और व्यावसायिक भवनों के अलावा 7.72 करोड़ रुपये की 6 एफडी शामिल हैं|

इसे भी पढ़ें:  सीबीएसई पैटर्न पर हिमाचल में प्रमोट होंगे 10वीं के छात्र, निर्देश जारी

गौरतलब है कि इस मामले का मुख्य आरोपी हरियाणा के करनाल का रहने वाला है, जहां ये छोटा सा फार्मेसी कॉलेज चलाता था| पहली पत्नी को तलाक देने के बाद इसने ऊना की रहने वाली अश्वनी कंवर से शादी की, अश्वनी कंवर के पिता आर्मी में थे| अशवनी कंवर के पिता ने अपनी बेटी को कुछ जमीन दे दी, जिसके बाद वो भूमि का मालिक बनी| यूनिवर्सिटी शुरू करने के लिए साल 2008 में आवेदन किया था जिसे राज्य सरकार ने कुछ कारणों से खारिज कर दिया था| साल 2009 में तत्तकालीन सरकार ने राज कुमार राणा को लेटर ऑफ इंटेन्ट जारी किया था| उसके बाद से ये पूरा खेल शुरू हुआ| यहां से अवैध तरीके से पैसे कमा कर राजस्थान के सिरोही में माधव विश्वविद्यालय शुरू की|

इसे भी पढ़ें:  हिमाचल में निजी कॉलेजों के प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जांच शुरू,निजी संस्थानों में मचा हड़कंप

इस मामले में राजकुमार राणा के अलावा अनुपमा ठाकुर, पंजाब के रहने वाले मुनीष गोयल, पश्चिम बंगाल निवासी कृष्ण कुमार, करनाल के प्रमोद कुमार, दिल्ली के केवल शर्मा और जम्मू के रहने वाले एजेंट मनु सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है| फर्जी डिग्री की पूरी डील कैश में होती थी| एक डिग्री लाखों में बेची गई है| इस खेल का पता लगाने के लिए पुलिस को काफी मश्कक्त करनी पड़ी|