CBSE Board Exams : नहीं होगी 10वीं कक्षा के लिए बोर्ड परीक्षा, 12वीं की परीक्षा टली

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प्रजासत्ता|
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इस बार की 10वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. वहीं, कक्षा 12वीं की परीक्षाओं को टाल दिया गया है| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को परीक्षाओं के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय शिक्षा सचिव और कई शीर्ष अधिकारियों को एक बैठक के लिए बुलाया था| बैठक के बाद एक एक बयान जारी कर बताया गया कि केंद्र सरकार ने देश भर में कोविड-19 महामारी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी है जबकि 12वीं की परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया है|

बता दें कि देशभर में कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर CBSE बोर्ड ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई हैं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं फिलहाल के लिए टाल दी गई हैं। 10वीं के नतीजे बोर्ड की गाइडलाइन के आधार पर तैयार किए जाएंगे। अगर कोई छात्र मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है तो कोरोना से हालात सामान्य होने पर वो परीक्षा दे सकता है। 12वीं कक्षा की परीक्षाएं बाद में होंगी।

बोर्ड 1 जून को स्थिति की समीक्षा करेगा। परीक्षाओं की शुरुआत से पहले कम से कम 15 दिनों का नोटिस दिया जाएगा। सीबीएसई की परीक्षाओं को रद्द करने या आगे बढ़ाने को लेकर उठ रही मांगों के मद्देनजर पीएम मोदी ने आज शिक्षा मंत्रालय के साथ एक बैठक की, जिसमें ये फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के सामने सीबीएससी ने ये प्रस्ताव दिया था कि 10वीं और 12वीं दोनों के इम्तिहान टाल दिये जाएं, लेकिन प्रधानमंत्री की सलाह पर 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई जबकि 12 वीं के इम्तिहान को फिलहाल टाल दिया गया।

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इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की बोर्ड परीक्षाओं पर चर्चा करने के लिए शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है।

देश भर में बड़े पैमाने पर कोविड की वजह से उन्हें रद्द करने की मांग की गई थी। पहले सीबीएसई ने आदेश दिया था कि कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएं 4 मई से शुरू होंगी। कक्षा 10 की परीक्षा 7 जून और कक्षा 12 की उसके चार दिन बाद समाप्त होनी थी। परीक्षा “ऑफ़लाइन-लिखित मोड” में कराने का निर्णय किया गया था। सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने इसकी जानकारी फरवरी में दी थी, जब एक समय में भारत में रोजाना कोविड के मामले 15,000 से कम हो गए थे।

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हालांकि अब संक्रमण की घातक दूसरी लहर देश में आ गई है और आज सुबह भारत ने 1,027 मौतों के साथ अब तक के सबसे अधिक एक दिन में 1,84,372 नए कोरोना वायरस संक्रमण दर्ज किए हैं।

सीबीएसई के अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने सोशल डिस्‍टेंसिंग दूरी सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत व्यवस्था की है। परीक्षा केंद्रों की संख्या में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि की गई है। जो छात्र प्रैक्टिकल परीक्षा देने से चूक गए हैं, उन्हें 11 जून से पहले दूसरा मौका मिलेगा। छात्रों को अपने परीक्षा केंद्रों को बदलने की अनुमति भी दी जाएगी। हालांकि, अधिक से अधिक लोग परीक्षा केंद्रों से कोविड फैलने की चिंता व्यक्त कर रहे थे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा रद्द करने और लाखों छात्रों को संक्रमण के शिकार होने से रोकने का आग्रह किया था।

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में वायरस के मामलों में खतरनाक वृद्धि की ओर इशारा करते हुए मंगलवार को कहा, “शहर में छह लाख छात्र बोर्ड परीक्षा के लिए उपस्थित होंगे। एक लाख शिक्षक ड्यूटी पर होंगे। बोर्ड परीक्षा आयोजित करने से कोरोनोवायरस का फैलाव हो सकता है। मूल्यांकन के वैकल्पिक तरीकों का पता लगाया जा सकता है। छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नत किया जा सकता है। बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी जानी चाहिए।”

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आज सुबह, पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने केंद्र से कई राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर देखने के बाद परीक्षा को स्थगित करने के लिए कहा था।

माता-पिता के एक संगठन ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि छात्रों को शारीरिक रूप से परीक्षा में बैठने के बजाय आंतरिक रूप से मूल्यांकन किया जाए। इंडिया वाइड पेरेंट्स एसोसिएशन ने अपने पत्र में बताया कि शिक्षकों और छात्रों को अभी तक टीका नहीं लगाया गया और उनके बीच संक्रमण की अधिक संभावना है। हाल ही में, एक लाख से अधिक छात्रों ने सरकार द्वारा बोर्ड परीक्षा रद्द करने या उन्हें ऑनलाइन आयोजित करने का आग्रह किया था।