Supreme Court Order NHAI Illegal Encroachment: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं, अवैध अतिक्रमण और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर संज्ञान लेते हुए कई महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उच्च गति वाले एक्सप्रेसवे प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण ‘खतरे का गलियारा’ (डेथ ट्रैप) नहीं बन सकते। सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत 13 अप्रैल को पारित किया।
अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के ‘राइट ऑफ वे’ में बने सभी प्रकार के अनधिकृत निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया है। इसमें ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों की समय सीमा दी है, जिसके भीतर सभी अवैध कब्जों को हटाया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में एनएचएआई (NHAI) या लोक निर्माण विभाग की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी ट्रेड लाइसेंस या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। वर्तमान में जारी लाइसेंसों की समीक्षा भी 30 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
यह न्यायिक हस्तक्षेप नवंबर 2023 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुई सड़क दुर्घटनाओं के बाद सामने आया है, जिनमें कुल 34 लोगों की मृत्यु हो गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि यात्री की सुरक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ‘गरिमा के साथ जीने के अधिकार’ का एक अभिन्न अंग है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कों पर सुरक्षित वातावरण मिले, क्योंकि यह राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सड़क सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, एनएचएआई को अगले 60 दिनों के भीतर हर 75 किलोमीटर की दूरी पर एम्बुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, वे-साइड सुविधाओं को अब अनिवार्य कर दिया गया है। इन सुविधाओं में यात्रियों के लिए विश्राम स्थल, भोजन, स्वच्छता के लिए शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और स्पष्ट संकेतक बोर्ड का होना आवश्यक है। सभी 4 और 6 लेन वाले राजमार्गों पर ‘एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू किया जाएगा ताकि यातायात की निगरानी बेहतर तरीके से हो सके।
दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय को 45 दिनों के भीतर देशभर के दुर्घटना संभावित ‘ब्लैकस्पॉट’ की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। इन चिह्नित स्थानों पर विशेष रूप से लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी संकेत स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, अदालत ने केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय समन्वय समिति के कामकाज और प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं ताकि राजमार्गों पर सुरक्षा तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सके।
















