SSR Update 2026: भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कराने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव आयोग ने यह बड़ा कदम उठाया है। जिन राज्यों में एसएसआर कराया जाएगा, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इसके अलावा 1 जनवरी तक असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुदुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा पश्चिम बंगाल में भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 2 नवंबर तक पोलिंग बूथ का पुनर्संयोजन पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 12 अक्टूबर को एकीकृत मतदाता सूची जारी की जाएगी।
मतदाता सूची को लेकर प्रक्रिया के तहत 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक आम लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करवा सकेंगे। इन आपत्तियों के निपटारे के लिए 28 दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आगामी 4 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची आधिकारिक तौर पर पब्लिश कर दी जाएगी। इस पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य पात्र मतदाताओं, विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के नाम सूची में शामिल करना और प्रविष्टियों में सुधार करना है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य मतदाता सूची की उपलब्धता को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी प्रमुख मांग रखी थी। हालांकि, आंकड़ों में हेरफेर की आशंकाओं और विभिन्न अदालती आदेशों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग ने फिलहाल इस मांग को खारिज कर दिया है। एक अहम बदलाव के तहत अब चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियों की ‘सॉफ्ट कॉपी’ उपलब्ध कराएगा।
अब मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियां बिना फोटो के ‘इमेज पीडीएफ’ के बजाय ‘पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप’ में प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही, मसौदा चरण में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित पूरक दस्तावेज भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इन 17 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि असम में कुछ कानूनी कारणों के चलते एसआईआर के बजाय विशेष पुनरीक्षण कराया गया था।
निर्वाचन आयोग के इस नए कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस घोषणा को लेकर निर्वाचन आयोग पर तीखा निशाना साधा है। कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और तीखे शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
कांग्रेस नेता के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी वर्ष 2025 से ही लगातार मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूचियों की मांग करती आ रही है। पारदर्शिता चुनावी प्रक्रिया की एक न्यूनतम आवश्यकता है और केवल अधिसूचना जारी कर देने से पूर्व की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए जाने की आवश्यकता है।
बहरहाल, निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई इन तारीखों के आधार पर अब संबंधित राज्यों में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं, और आगामी 4 जनवरी को आने वाली अंतिम सूची पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।




















