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Bahra University - Shimla Hills
 

संपादकीय

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

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दिसम्बर 2, 2020

तृप्ता भाटिया| बचपन में दिल्ली का पता नहीं था मुझे, अपने घर....

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जो लोग समय होते हुए भी लंबे लेख नहीं पढ़ पाते उनकी मानसकिता केवल”मैं” होती है।

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दिसम्बर 1, 2020

जो लोग लंबे लेख नहीं पढ़ पाते समय होते हुए भी उनकी....

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मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करने है, आपकी क्या है ?तय कीजिये

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नवम्बर 30, 2020

मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करना है और आपकी नियत पर निर्भर....

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आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं।

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नवम्बर 29, 2020

तृप्ता भाटिया ✍️ आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी....

शीतल शर्मा की कलम से "मेरी बात सुनो"

शीतल शर्मा की कलम से “मेरी बात सुनो”

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अक्टूबर 3, 2020

सुनो तो, रोती तुम हो भीग हम जाते हैं! टपक- टपक जब....

मोबाइल और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है

मोबाइल और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है

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अक्टूबर 2, 2020

तृप्ता भाटिया| अमेज़न/फ्लिपकार्ट पर मोबाइल के मॉडल देखते हुए लगता, ये सही....

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