Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित प्रदेश सचिवालय में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए एलर्सली फेस-II भवन का मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को आधिकारिक उद्घाटन कर दिया। वहीं इस नए प्रशासनिक भवन के शुरू होने के साथ ही इससे जुड़ा एक महत्वपूर्ण और विवादित मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष भी पहुंच गया है। ऐतिहासिक एलर्सली भवन के समीप किए गए इस नए कंक्रीट निर्माण की वैधता को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हो रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नए भवन का शुभारंभ करते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन के लिए बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस नए ढांचे से जनहित से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुचारू और त्वरित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस उद्घाटन अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, आयुष मंत्री यादविंदर गोमा, डिप्टी चीफ व्हिप केवल सिंह पठानिया तथा विधायक चंद्रशेखर सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि एक तरफ जहां राज्य सरकार इस नए भवन को प्रशासनिक दक्षता की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, वहीं दूसरी तरफ जिस भवन का उद्घाटन हुआ है, उसी के निर्माण की प्रक्रिया और स्थल चयन को लेकर हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती दी गई है। एलर्सली भवन फेज-II के निर्माण को लेकर प्राप्त हुई शिकायत के आधार पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए इस जनहित याचिका को दर्ज किया था। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ इस पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई कर रही है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग तथा शहरी विकास विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। मामले की निष्पक्षता और न्यायिक सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता देव्यानी शर्मा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है, जो इस याचिका में अदालत को कानूनी सहयोग प्रदान कर रही हैं।
दरअसल, यह पूरा कानूनी विवाद कैप्टन अतुल शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक, शहरी विकास विभाग के अधीक्षण अभियंता, संबंधित राजस्व अधिकारी, नगर निगम आयुक्त और आर्किटेक्ट प्लानर सहित सभी मुख्य उत्तरदायी अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि ऐतिहासिक एलर्सली भवन के बिल्कुल आसपास बनाए गए इस नए कंक्रीट ढांचे से इस ऐतिहासिक विरासत के मूल स्वरूप और सौंदर्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, याचिका में निर्माण कार्य के दौरान नगर निगम और शहरी विकास के अनिवार्य सेट-बैक नियमों के उल्लंघन और उनके पालन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से इस नए निर्माण और ऐतिहासिक भवन से सटे संवेदनशील क्षेत्र में किए गए भौगोलिक बदलावों से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और जानकारियां भी एकत्र की थीं। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि विरासत संरक्षण विशेषज्ञ, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सदस्यता वाली एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए। यह समिति मौके का निरीक्षण करे और अपनी विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध सीमा के भीतर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
भवन में 15 आधुनिक कमरे, 40 वाहनों की पार्किंग
उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि नए प्रशासनिक भवन में मुख्य सचिव कार्यालय सहित करीब 15 आधुनिक कमरे बनाए गए हैं। परिसर में लगभग 40 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा भी तैयार की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले सचिवालय के मुख्य द्वार के बाहर वाहन खड़े होने के कारण यातायात प्रभावित होता था। नई पार्किंग व्यवस्था से ऊपरी सड़क को खाली रखने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भवन के साथ लगती जगह पर एक और कार्यालय भवन बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में पूरा मंत्रिमंडल एक ही परिसर में बैठकर जनहित के कार्यों को संचालित कर सके। मुख्यमंत्री ने इसे दीर्घकालिक प्रशासनिक संस्थान बताते हुए कहा कि आने वाली सरकारें भी इस कार्यालय परिसर का इस्तेमाल कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्माण किसी व्यक्ति विशेष का घर नहीं, बल्कि लोकतंत्र का एक 50 साल तक चलने वाला मजबूत संस्थान है। आगामी 15-20 वर्षों में यदि विपक्ष का भी कोई मुख्यमंत्री बनता है, तो वह इसी कार्यालय परिसर से राज्य की गतिविधियों का संचालन करेगा।
विपक्ष पर बोला तीखा हमला
इस दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर जल विद्युत परियोजनाओं के समझौते को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह दावा पूरी तरह से गलत है कि किसी समझौते में केंद्रीय नेतृत्व या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तक्षेप था। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के अधिकारों और 12 प्रतिशत बिजली रॉयल्टी के मुद्दे पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष राज्य सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से रखा।
मुख्यमंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 412 मेगावाट की परियोजना से आने वाले पांच वर्षों में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार को सालाना 1200 से 1500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि वर्तमान सरकार राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने राज्य में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के पुनर्वितरण के भी स्पष्ट संकेत दिए।


















