Khushwant Singh Lit Fest 2026: हिमाचल प्रदेश की पर्यटक नगरी कसौली की पहाड़ियों में अक्टूबर का महीना एक बार फिर साहित्य और विचारों के नाम रहने वाला है। क्योंकि खुशवंत सिंह लिटफेस्ट 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक अपर मॉल स्थित ऐतिहासिक कसौली क्लब में किया जाएगा। इस बार महोत्सव की थीम ‘असहमति की कला : विभाजनों के पार संवाद’ रखी गई है।
लिटफेस्ट के तीन दिवसीय आयोजन के दौरान साहित्य और संस्कृति के साथ-साथ समाज और दुनिया से जुड़े कई ऐसे मुद्दों पर बातचीत होगी, जिन पर आज अलग-अलग राय देखने को मिलती है। इस बार के आयोजन में राजनीतिक ध्रुवीकरण, पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सत्य और मानवीय आवाज, भारत-पाकिस्तान संवाद और सीमाओं के पार लेखन जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा बांग्लादेश और श्रीलंका के संदर्भ में क्षेत्रीय संवाद, लैंगिक पहचान और महिला सशक्तिकरण, भाषा-संस्कृति और पहचान, साहित्य में असहमति की जगह, पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन, लोकतंत्र और प्रतिध्वनि कक्ष जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। महोत्सव के कुछ सत्रों में ‘आहत करने का साहस’ और ‘दूसरे पक्ष को पढ़ना’ जैसे विषयों के जरिए यह सवाल भी सामने रखा जाएगा कि अलग विचार रखने वाले व्यक्ति को समझने और उससे बातचीत करने की गुंजाइश समाज में कितनी बची है।
कई क्षेत्रों के चर्चित चेहरे होंगे शामिल
इस बार खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में साहित्यकारों के साथ पत्रकार, वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, सैन्य अधिकारी, चिकित्सक, कलाकार और कारोबारी क्षेत्र से जुड़े लोग भी हिस्सा लेंगे। वक्ताओं की सूची में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (डॉ.) मनोज नरवणे, लेखक और कवि जेरी पिंटो, रंगमंच की जानी-मानी हस्ती नीलम मैन सिंह चौधरी, पर्यावरण पत्रकार बहार दत्त, पत्रकार-लेखिका रानी सिंह, लेखक रूपिंदर सिंह, लेखिका कमला के. कपूर, पत्रकार गिलियन राइट, पत्रकार होइनू हाउजेल, साहित्यिक एजेंट प्रीति गिल और लेखक प्रोबल दासगुप्ता के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा, मनोविज्ञान शोधकर्ता निष्ठा लांबा, विज्ञान लेखिका उपासना सर्राजू, विज्ञान संचारक बर्टी एश्ले, लेखक और निवेश विशेषज्ञ सार्थक आहूजा, अभिनेता-लेखिका संध्या मृदुल और अन्य वक्ता भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
लिटफेस्ट में रिश्तों और निजी जीवन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। अंतरंगता की क्यूरेटर संस्था की संस्थापक आइली सेगेट्टी अंतरंगता, रिश्तों, जुड़ाव और आत्म-खोज पर बातचीत करेंगी। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेखिका डॉ. अमरिंदर कौर बजाज महिला यौन स्वास्थ्य और सामाजिक वर्जनाओं से जुड़े विषय पर अपनी पुस्तक ‘क्लोजिंग द प्लेजर गैप’ के संदर्भ में चर्चा करेंगी।
2012 में हुई थी खुशवंत सिंह लिटफेस्ट की शुरुआत
उल्लेखनीय है कि खुशवंत सिंह लिटफेस्ट की शुरुआत 2012 में हुई थी। खास बात यह है कि पहला आयोजन खुशवंत सिंह के जीवनकाल में ही कसौली में हुआ था। पहला महोत्सव 12 से 14 अक्टूबर 2012 तक कसौली क्लब में आयोजित किया गया था। उस समय खुशवंत सिंह 97 वर्ष के थे और महोत्सव को उनके विचारों, रुचियों तथा कसौली से उनके गहरे जुड़ाव से जोड़ा गया था।
लिटफेस्ट की शुरुआत उनके बेटे राहुल सिंह और उनके मित्रों की पहल से हुई थी। समय के साथ यह आयोजन खुशवंत सिंह की स्मृति और उनके साहित्यिक सरोकारों से जुड़ा एक वार्षिक आयोजन बन गया। वर्ष 2026 का आयोजन इसका 15वां संस्करण है। शुरुवात से ही संस्करण में साहित्य के साथ कसौली की पारिस्थितिकी, विरासत, औपनिवेशिक इतिहास, भारत-पाकिस्तान संबंध और महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों को जगह दी गई थी। यानी शुरुआत से ही यह आयोजन केवल किताबों और लेखकों तक सीमित नहीं रहा।
कसौली से था खुशवंत सिंह का खास रिश्ता
खुशवंत सिंह का कसौली से पुराना और गहरा रिश्ता था। कसौली में उनका राज विला नाम का घर था और वह लंबे समय तक यहां आते-जाते रहे। उनके कई लेखन और स्तंभों से कसौली का रिश्ता जुड़ा रहा। उनकी चर्चित किताब ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ से लेकर अन्य लेखन के संदर्भ में भी कसौली का उल्लेख मिलता है। यही वजह है कि उनके नाम पर होने वाला साहित्य महोत्सव किसी दूसरे शहर के आयोजन से अलग दिखाई देता है। जिस पहाड़ी कस्बे से उनका व्यक्तिगत और साहित्यिक रिश्ता रहा, उसी जगह हर साल उनके नाम पर देश-दुनिया के लेखक और विचारक जुटते हैं।
कौन थे खुशवंत सिंह?
खुशवंत सिंह भारत के प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार, स्तंभकार और इतिहासकार थे। उनका जन्म 2 फरवरी 1915 को हुआ था। उन्होंने लंबे समय तक पत्रकारिता की और द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया सहित कई प्रमुख प्रकाशनों के संपादक के रूप में काम किया। वे अपनी स्पष्टवादिता, व्यंग्य और सामाजिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक लेखन के लिए जाने जाते थे।
उनकी चर्चित रचनाओं में ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’, ‘दिल्ली’ और ‘द कंपनी ऑफ वुमन’ तथा इतिहास पर उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। भारत-पाकिस्तान संबंध, धर्म, राजनीति, समाज और आम जिंदगी उनके लेखन के प्रमुख विषयों में रहे। खुशवंत सिंह को साहित्य और पत्रकारिता में योगदान के लिए पद्म भूषण और बाद में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
बता दें कि भारत के सुप्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह का निधन 20 मार्च 2014 को 99 वर्ष की उम्र में हुआ। उनके निधन के बाद भी उनके नाम से शुरू हुआ कसौली का यह आयोजन जारी रहा। आज खुशवंत सिंह लिटफेस्ट उनकी साहित्यिक विरासत के साथ-साथ उन विषयों पर बातचीत का मंच भी बन चुका है, जिन पर समाज में बहस और असहमति मौजूद है।


















