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Punjab Congress Clash: चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में घमासान, प्रदेशाध्यक्ष राजा वडिंग के इस्तीफे से उठे सवाल, अब किसे मिलेगी कमान?

Punjab Congress Crisis: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में बढ़ा सियासी घमासान, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस्तीफे की पेशकश की, नए अध्यक्ष को लेकर मंथन तेज।
Updated By Prajasatta
Published on: 1 अक्टूबर 2026
Punjab Congress Clash: चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में घमासान, प्रदेशाध्यक्ष राजा वडिंग के इस्तीफे से उठे सवाल, अब किसे मिलेगी कमान?

Punjab Congress Clash: पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य इकाई में पिछले कई हफ्तों से जारी तीव्र कलह के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बुधवार, 30 सितंबर को अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने वडिंग को पद से हटाने के अपने फैसले की जानकारी पहले ही दे दी थी, जिसके तुरंत बाद उन्होंने यह कदम उठाया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के सामने आते ही राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी।

पंजाब कांग्रेस के भीतर यह अप्रत्याशित कदम पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के गुटों के बीच महीनों से चले आ रहे गहरे मतभेदों का परिणाम है। स्थिति को नियंत्रित करने और नया प्रदेश प्रमुख चुनने के लिए हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल तथा पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने उच्च स्तरीय बैठक कर गहन चर्चा की थी।

पार्टी आलाकमान का मुख्य उद्देश्य राज्य में एक ऐसे संतुलित चेहरे को नियुक्त करना है, जो 2027 के बेहद महत्वपूर्ण चुनावी समर से पहले वडिंग और चन्नी के परस्पर विरोधी गुटों को एक मंच पर ला सके और पार्टी को एकजुट रख सके।

इस कड़े मुकाबले और अंदरूनी खींचातान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य विजय इंदर सिंगला का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। उल्लेखनीय है कि सिंगला को पार्टी ने बीते 1 जुलाई को पंजाब चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। सिंगला के अलावा इस शीर्ष पद के लिए कई अन्य दिग्गजों के नामों पर भी गंभीर विचार-विमर्श जारी है।

इनमें पूर्व ओलंपियन व जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह, पूर्व विधायक राणा के. पी. सिंह, राजा सांसी से विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा किसी भी समय की जा सकती है।

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की यह समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है। यह तनाव उस समय से लगातार बढ़ता गया जब 1 जुलाई को पार्टी ने एक ओर वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा था, वहीं दूसरी ओर चन्नी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त किया था। पार्टी आलाकमान ने पहले भी राज्य इकाई के भीतर उभरे इन गंभीर मतभेदों को सुलझाने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को विशेष रूप से पंजाब भेजा था।

हालांकि, बघेल के प्रयासों के बावजूद पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक बैठकों में विरोधी गुटों के बीच का कड़वा तनाव लगातार सतह पर आता रहा, जिससे संगठन की साख को भारी धक्का पहुंचा। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के लिए यह अनियंत्रित गुटबाजी सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

हाल ही में चलाए गए ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान भी यह खींचतान खुल कर सामने आई, जब चन्नी के समर्थकों ने वडिंग के सामने ही उनके पक्ष में नारेबाजी की। इतना ही नहीं, राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित बैठकों में चन्नी और वडिंग के समर्थकों के बीच आपस में तीखी झड़पें होने की भी कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इन घटनाओं ने पार्टी की चुनावी तैयारियों और जनसंपर्क अभियानों पर विपरीत प्रभाव डाला है।

उल्लेखनीय है कि पंजाब कांग्रेस के लिए अंदरूनी गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले साल 2021 में भी नवजोत सिंह सिद्धू के साथ लंबे समय तक चले तीखे राजनीतिक विवाद के बाद कांग्रेस आलाकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था। उस समय राज्य की कमान चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपी गई थी। अब एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है, जहां चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा लिखी जा चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आलाकमान का नया फैसला पंजाब कांग्रेस में बिखराव को रोक पाता है या नहीं।

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