IPS Sanjeev Gandhi FIR: हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। शिमला के पूर्व एसएसपी और मौजूदा डीआईजी संजीव गांधी की मुश्किलें लगातार बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनके खिलाफ शिमला में एक और नया मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित ऑडिट समिति की रिपोर्ट में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर की गई है। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तत्कालीन एसएसपी शिमला संजीव गांधी के विरुद्ध पुलिस थाना शिमला में एफआईआर संख्या 139/2026, दिनांक 22.10.2026, भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कदम ऑडिट रिपोर्ट में पाई गई वित्तीय गड़बड़ियों के बाद उठाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के मुताबिक आगे की विधिक कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर सुनिश्चित की जाएगी।

सरकारी आवास ‘साउथवुड’ पर भारी खर्च का खुलासा
विज्ञप्ति के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए कुल लगभग 1.28 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। जांच में पाया गया कि इस राशि में से 14,07,392 रुपये तत्कालीन एसएसपी संजीव गांधी के अपने निजी उपयोग वाले सरकारी आवास ‘साउथवुड’ की मरम्मत पर खर्च किए गए दर्शाए गए। हैरानी की बात यह है कि इस आवास की मरम्मत के लिए सरकार या पुलिस मुख्यालय की तरफ से कोई भी अलग बजट स्वीकृत नहीं किया गया था। इसके अलावा, संबंधित कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति या आवश्यक स्वीकृतियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख तथ्य
ऑडिट समिति की जांच में कई अन्य चौंकाने वाले वित्तीय तथ्य भी उजागर हुए हैं। रामपुर के एसडीपीओ आवास के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये की धनराशि को संबंधित आवास की मरम्मत के बजाय तत्कालीन एसएसपी के शिमला स्थित सरकारी आवास पर खर्च दिखाया गया। इसी प्रकार, शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित 2.50 लाख रुपये की राशि भी फरवरी 2023 में कार्य पूरा होने का हवाला देकर प्राप्त की गई और उसे भी तत्कालीन एसएसपी के आवास पर खर्च दर्शा दिया गया, जबकि ऑडिट के दौरान शोघी में किसी भी प्रकार की मरम्मत का कार्य पूरा होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1.62 लाख रुपये तथा 2024-25 में 7.22 लाख रुपये तत्कालीन संजीव गांधी के आवास पर खर्च दर्शाए गए। इन सभी कार्यों के लिए आवश्यक पूर्व स्वीकृति और जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के दस्तावेज भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं पाए गए। इसके अलावा, वर्ष 2025-26 में 28.67 लाख रुपये के बजट के अंतर्गत प्रस्तावित 50 कार्यों में से 22 कार्य किए जाने का रिकॉर्ड मिला, जिनमें से 13 कार्य स्वीकृत मूल प्रस्तावों से पूरी तरह बाहर के थे।
जांच जारी और नियमानुसार होगी कार्रवाई
ऑडिट में इन तमाम संबंधित खर्चों के पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण यह भी एक बड़ा जांच का विषय बन गया है कि दर्शाई गई धनराशि वास्तव में किन कार्यों पर खर्च की गई। साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या इस प्रक्रिया में निर्धारित वित्तीय नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया गया था या नहीं। एसपी शिमला द्वारा यह पूरा मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद, पुलिस मुख्यालय ने तुरंत प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने के सख्त आदेश दिए। फिलहाल इस पूरे प्रकरण की जांच लगातार जारी है और जांच में सामने आने वाले ठोस साक्ष्यों के आधार पर आगामी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



















