थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं।
थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं। यह बात मैंने सिर्फ कुछ दिनों में महसूस की....
बन्द करो सोशल मीडिया पर नँगा नाच अपना
अरे ओ झंड मंच के कलाकारों सोनिया स्मृति हो गया हो तुम्हारा तो कभी किसी मर्द के सहारे भी राजनीति करो या काबिल नहीं हो।....
बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!
तृप्ता भाटिया| बचपन में दिल्ली का पता नहीं था मुझे, अपने घर से नाना का घर बहुत दूर लगता था। बसें टाइम से चलती थी....
जो लोग समय होते हुए भी लंबे लेख नहीं पढ़ पाते उनकी मानसकिता केवल”मैं” होती है।
जो लोग लंबे लेख नहीं पढ़ पाते समय होते हुए भी उनकी मानसिकता केवल “मैं”होती है उनको जहाँ लगता कि जब मेरी तरीफ या बात....
मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करने है, आपकी क्या है ?तय कीजिये
मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करना है और आपकी नियत पर निर्भर है कि आपकी क्या है? आप दुनिया के सारे मुद्दे शिक्षा गरीबी रोज़गार....
आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं।
तृप्ता भाटिया ✍️ आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं। दूसरे लोगों को कूड़ादान समझना बन्द करें....
शीतल शर्मा की कलम से “मेरी बात सुनो”
सुनो तो, रोती तुम हो भीग हम जाते हैं! टपक- टपक जब वह गिरते हैं ,तो मेरे सीने में आग लगा जाते हैं!! बच्चों जैसे....
मोबाइल और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है
तृप्ता भाटिया| अमेज़न/फ्लिपकार्ट पर मोबाइल के मॉडल देखते हुए लगता, ये सही है, ये ले लें तो मौज आए। बिल्कुल ऐसे ही सोशल मीडिया पर....












