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बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं।

December 16, 2020

थोड़ा एटीट्यूड भी रखना जरूरी होता है, ज्यादा झुकने पर लोग गिरा हुआ समझ लेते हैं। यह बात मैंने सिर्फ कुछ दिनों में महसूस की....

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

बन्द करो सोशल मीडिया पर नँगा नाच अपना

December 6, 2020

अरे ओ झंड मंच के कलाकारों सोनिया स्मृति हो गया हो तुम्हारा तो कभी किसी मर्द के सहारे भी राजनीति करो या काबिल नहीं हो।....

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

बड़े न होते तो सारे फसाद खड़े न होते!

December 2, 2020

तृप्ता भाटिया| बचपन में दिल्ली का पता नहीं था मुझे, अपने घर से नाना का घर बहुत दूर लगता था। बसें टाइम से चलती थी....

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जो लोग समय होते हुए भी लंबे लेख नहीं पढ़ पाते उनकी मानसकिता केवल”मैं” होती है।

December 1, 2020

जो लोग लंबे लेख नहीं पढ़ पाते समय होते हुए भी उनकी मानसिकता केवल “मैं”होती है उनको जहाँ लगता कि जब मेरी तरीफ या बात....

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मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करने है, आपकी क्या है ?तय कीजिये

November 30, 2020

मेरी जिमेबारी कलम से प्रहार करना है और आपकी नियत पर निर्भर है कि आपकी क्या है? आप दुनिया के सारे मुद्दे शिक्षा गरीबी रोज़गार....

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आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं।

November 29, 2020

तृप्ता भाटिया ✍️ आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं। दूसरे लोगों को कूड़ादान समझना बन्द करें....

शीतल शर्मा की कलम से "मेरी बात सुनो"

शीतल शर्मा की कलम से “मेरी बात सुनो”

October 3, 2020

सुनो तो, रोती तुम हो भीग हम जाते हैं! टपक- टपक जब वह गिरते हैं ,तो मेरे सीने में आग लगा जाते हैं!! बच्चों जैसे....

मोबाइल और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है

मोबाइल और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है

October 2, 2020

तृप्ता भाटिया| अमेज़न/फ्लिपकार्ट पर मोबाइल के मॉडल देखते हुए लगता, ये सही है, ये ले लें तो मौज आए। बिल्कुल ऐसे ही सोशल मीडिया पर....

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