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Himachal News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिमाचल पंचायत चुनाव पर संशय, महाधिवक्ता ने गिनाईं व्यावहारिक चुनौतियां

Published on: 10 January 2026
Himachal News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिमाचल पंचायत चुनाव पर संशय, महाधिवक्ता ने गिनाईं व्यावहारिक चुनौतियां

Himachal News: हिमाचल हाई कोर्ट के पंचायत चुनाव को लेकर आए फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा है कि अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर पंचायत चुनाव करवाना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है। शुक्रवार को हाई कोर्ट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि राज्य सरकार कभी भी पंचायती राज चुनाव से पीछे नहीं हटी है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।

महाधिवक्ता ने कहा कि आपदा आने से पहले ही राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। 31 दिसंबर 2024 से 8 जुलाई 2025 तक डिलिमिटेशन का कार्य पूरा कर लिया गया था। हालांकि देवेंद्र नेगी मामले में हाई कोर्ट के फैसले के बाद डिलिमिटेशन को पुराने नियमों के तहत दोबारा करने के आदेश दिए गए, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि यदि यह कानूनी अड़चन नहीं आती तो 15 जनवरी तक पंचायत चुनाव संभव हो सकते थे।

अनूप रतन ने बताया कि अब हाई कोर्ट के आदेशों को लेकर सरकार स्तर पर चर्चा की जाएगी और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हमेशा चुनाव कराने के पक्ष में रही है, लेकिन चुनाव आयोग संवेदनशील हालात को देखते हुए ही चुनाव कराना चाहता था।

उन्होंने अदालत की तय टाइमलाइन को लेकर व्यावहारिक दिक्कतों की ओर भी ध्यान दिलाया। मार्च और अप्रैल में स्कूलों की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और चुनाव प्रक्रिया में स्कूल अध्यापकों की ड्यूटी लगती है। चुनाव करवाने के लिए हजारों कर्मचारियों की जरूरत होती है, ऐसे में शिक्षकों को बाइपास कर चुनाव कराना संभव नहीं है। इसके अलावा रोस्टर जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय न मिल पाने से प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों के संचालन को लेकर सरकार के पास दो विकल्प होंगे। या तो पंचायत सचिव को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा या फिर पंचायतों के संचालन के लिए कमेटी गठित की जाएगी। इस बारे में अंतिम फैसला प्रदेश सरकार लेगी। प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम सभाएं प्रशासकों द्वारा ही करवाई जाएंगी।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है, जबकि प्रदेश के 50 शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी को खत्म हो जाएगा। प्रदेश में कुल 3586 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषदें और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं।

राज्य चुनाव आयोग ने 19 नवंबर को कोड ऑफ कंडक्ट की धारा 2.1 के तहत आदेश जारी कर नई पंचायतों के गठन और वार्डों के पुनर्सीमांकन पर रोक लगाई थी। इसके बाद पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट में लगातार तीन दिन सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने प्रदेश सरकार को 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं।

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