India GDP FY27: पश्चिम-पूर्व संकट के बीच मॉर्गन स्टैनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के वास्तविक जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान को 30 आधार अंकों की कटौती करते हुए 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले इसकी उम्मीद 6.5 प्रतिशत थी। मॉर्गन स्टैनली ने FY27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है। साथ ही गैस उपलब्धता को भी अतिरिक्त बाधा माना गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची कीमतें और औद्योगिक आपूर्ति में कमी के कारण इनपुट लागत बढ़ रही है, जिससे चयनित उत्पादन में कटौती हो रही है। रुपए के कमजोर होने के साथ आयातित मुद्रास्फीति भी बढ़ रही है। मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, ऊंची उत्पादन लागत, मुद्रा कमजोरी और खाद्य व कोर वस्तुओं की मजबूत कीमतों के कारण FY27 में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
उच्च तेल कीमतों से चालू खाता घाटा लगभग 150 आधार अंकों की वृद्धि के साथ जीडीपी का करीब 2.5 प्रतिशत हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, “हाल के वर्षों में पूंजी प्रवाह वित्तपोषण की जरूरतों से पीछे रहने के कारण हम उम्मीद करते हैं कि भुगतान संतुलन तीसरे वर्ष भी घाटे में रहेगा, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ेगा।”
मॉर्गन स्टैनली की मुख्य भारत अर्थशास्त्री उपासना चाचरा ने बानी गंभीर और श्रेया सिंह के साथ लिखे नोट में कहा, “इस पृष्ठभूमि में हमने FY27 के वास्तविक जीडीपी पूर्वानुमान को 30 आधार अंक घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है (पहले 6.5 प्रतिशत)। हम उम्मीद करते हैं कि जून 2026 में समाप्त होने वाले तिमाही में वृद्धि 5.9 प्रतिशत के निचले स्तर पर पहुंच जाएगी, क्योंकि औद्योगिक गतिविधियां कमजोर होंगी, मार्जिन दबाव में आएंगे और बाहरी वित्तपोषण सख्त होगा।
इसके बाद आपूर्ति झटकों के कम होने और नीतिगत सहायता के प्रभावी होने के साथ वृद्धि धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी।” हाल ही में मूडीज रेटिंग्स ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था।
ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत (2025-26) से घटकर 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। ईवाई ने कहा कि FY27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि अपने आधारभूत अनुमान से करीब 1 प्रतिशत अंक कम रह सकती है, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति में करीब 1.5 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा आईसीआरए ने भी ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण FY27 में वृद्धि 6.5 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान व्यक्त किया है।



















