Bollywood News फिल्म ‘लक्ष्य’ के निर्माण के दौरान सेट का माहौल बेहद अनुशासित था। इसका पूरा श्रेय तत्कालीन सहायक निर्देशकों (Assistant Directors) रीमा कागती और जोया अख्तर को जाता है। फिल्मकार अनुराग कश्यप ने एक हालिया चर्चा के दौरान बताया कि उस समय सेट पर ये दो नाम ऐसे थे, जिनसे पूरी यूनिट अनुशासन में रहती थी। रीमा और जोया के लिए कलाकार का कद मायने नहीं रखता था, यदि काम में देरी हो रही हो, तो वे किसी को भी टोकने से पीछे नहीं हटती थीं।
अनुराग कश्यप ने खुलासा किया कि जोया और रीमा इतनी अधिक पेशेवर थीं कि वे अमिताभ बच्चन तक को सेट पर डांट लगा देती थीं। कश्यप के अनुसार, वे उनसे स्पष्ट शब्दों में कहती थीं, “सर, आपकी सेट पर जरूरत है, आप देर कर रहे हैं।” अमिताभ बच्चन भले ही फिल्म जगत में अपनी समयबद्धता (punctuality) के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी सेट पर होने वाली तकनीकी चर्चाओं के कारण काम में मामूली देरी हो जाती थी।
सहायक निर्देशकों का यह सख्त रवैया महानायक पर गहरा प्रभाव डालता था। इसी अनुशासित कार्यशैली के कारण अमिताभ बच्चन ने रीमा कागती को ‘गोरखा’ नाम से पुकारना शुरू कर दिया था। भारतीय सेना की सबसे अनुशासित ‘गोरखा रेजिमेंट’ के नाम पर रखा गया यह निकनेम, रीमा कागती के उस सैनिक जैसे कठोर अनुशासन का सम्मान था, जिसके जरिए वे फिल्म की शूटिंग को समय पर पूरा सुनिश्चित करती थीं।
उल्लेखनीय है कि फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘लक्ष्य’ 18 जून 2004 को रिलीज हुई थी। यह फिल्म एक ऐसे युवक की कहानी थी, जिसका जीवन में कोई उद्देश्य नहीं था, लेकिन भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। ऋतिक रोशन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन अभिनीत यह फिल्म आज भी सैन्य जीवन की जीवंत और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए सिनेमाई इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।
















