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PM Modi Appeal: कोरोना से भी बड़ा है मिडिल ईस्ट संकट, अब क्या करेंगे आप?

PM Modi Gold Petrol Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के युद्ध को दशक की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और ईंधन-सोने की खपत कम करने की विशेष अपील की है।
PM Modi Appeal: कोरोना से भी बड़ा है मिडिल ईस्ट संकट, अब क्या करेंगे आप?

PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक आर्थिक संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गुजरात के वडोदरा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इस स्थिति की गंभीरता की तुलना कोरोना काल से की। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो वर्तमान युद्ध इस दशक का सबसे बड़ा संकट बनकर उभरा है। उन्होंने देशवासियों से इस कठिन समय में ‘जनभागीदारी’ के माध्यम से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को सहारा देने का आह्वान किया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सरकार अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रही है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर आम जनता पर कम से कम पड़े। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि बिना नागरिकों के सक्रिय सहयोग के इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह देश ने एकजुट होकर कोरोना जैसी महामारी को मात दी थी, ठीक उसी तरह सामूहिक प्रयासों से हम इस अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव से भी बाहर निकलने में सफल होंगे।

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देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने कुछ व्यावहारिक सुझाव रखे हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपनी दैनिक आदतों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाएं। इसमें सबसे प्रमुख सुझाव ईंधन की बचत को लेकर है। पीएम मोदी ने कहा कि जहां भी संभव हो, लोग पेट्रोल और डीजल से चलने वाले निजी वाहनों का उपयोग कम करें। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और सार्वजनिक परिवहन के साधनों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

प्रधानमंत्री ने सोने के आयात पर होने वाले भारी खर्च पर भी देश का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि सोने की खरीद के कारण देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर चला जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक सोने की नई खरीद को टाल देना ही राष्ट्रहित में होगा। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य तेल के उपयोग में भी कटौती करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि खाद्य तेल के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है और इसकी खपत कम करना देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के स्वास्थ्य, दोनों के लिए लाभदायक है।

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आर्थिक दबाव को कम करने और सड़कों पर वाहनों के भार को घटाने के लिए प्रधानमंत्री ने डिजिटल माध्यमों को फिर से अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) मॉडल पर विचार करने को कहा है। साथ ही, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों से भी आग्रह किया गया है कि जहां संभव हो, वहां ऑनलाइन क्लास संचालित की जाएं। प्रधानमंत्री के अनुसार, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचना भी इस समय देश के प्रति एक बड़ा योगदान होगा, क्योंकि इससे देश की पूंजी बाहर जाने से रुकेगी।

अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए कहा कि यह समय अपनी सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर देश के प्रति समर्पित होने का है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘कोरोना से बड़ा संकट’ होने के बावजूद भारत अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण झुकेगा नहीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन सुझावों को एक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें ताकि भारत इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रख सके।

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