Sirmour News: हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर स्थित राजकीय माध्यमिक पाठशाला बाग हाबड़ा में सोमवार की सुबह खौफ और अफरातफरी के साथ शुरू हुई। दो दिन की छुट्टी के बाद जैसे ही स्कूल खुला, तो अंदर का भयावह नजारा देखकर स्टाफ सदस्यों और बच्चों के होश उड़ गए। स्कूल परिसर की धरातल मंजिल पर जानवरों के पंजों के गहरे निशान बने हुए थे, जबकि ऊपरी मंजिल के बरामदे की बाहरी दीवारों पर खून लगा हुआ था। इस मंजर को देखते ही पूरे स्कूल परिसर में दहशत का माहौल बन गया।
यह मामला तहसील कमरऊ की ग्राम पंचायत भजौण के अंतर्गत आने वाली इस पाठशाला का है। अचानक फर्श पर तेंदुए के पंजों के स्पष्ट निशान और दीवारों पर ताजा खून देखकर बच्चे और शिक्षक सहम उठे। सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए बाद में स्कूल स्टाफ ने मिलकर खून से सनी दीवारों को साफ किया। हालांकि, परिसर में तेंदुए की संभावित आवाजाही की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में भी डर का माहौल बन गया।
घटना की जानकारी देते हुए विद्यालय प्रभारी चंद्र प्रकाश ने बताया कि सोमवार सुबह स्कूल पहुंचते ही पंजों और खून के निशान मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि धरातल वाली मंजिल पर पंजों के निशान थे और ऊपरी मंजिल के बरामदे की बाहरी दीवारें खून से लाल थीं। कयास लगाए जा रहे हैं कि तेंदुआ किसी जानवर का शिकार करने के बाद उसे घसीटते हुए स्कूल परिसर तक ले आया होगा।
आशंका यह भी जताई जा रही है कि शिकार तेंदुए के चंगुल से छूटने के लिए छटपटाया हो या तेंदुए ने शिकार को दीवार पर पटका हो, जिसके कारण दीवारों पर खून के बड़े निशान बन गए। हालांकि, घटनास्थल पर असल में क्या हुआ था और खून के निशानों की वास्तविक वजह क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। लेकिन स्कूल परिसर में जंगली जानवर की मौजूदगी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाग हाबड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों से तेंदुए की गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुआ आए दिन पालतू और आवारा पशुओं को अपना शिकार बना रहा है, जिससे पूरा इलाका खौफ के साये में जीने को मजबूर है। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पहले भी वन विभाग को शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, लेकिन ठोस कदम न उठाए जाने से नाराजगी बढ़ रही है।
स्कूल परिसर के भीतर तेंदुए के पंजों और खून के निशान मिलने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता बेहद गंभीर हो गई है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तेंदुए की चहलकदमी पर तुरंत संज्ञान लिया जाए और गश्त बढ़ाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द से जल्द सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी या जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।



















