Khushwant Singh Lit Fest 2026: पर्यटक नगरी कसौली के ऐतिहासिक क्लब में आयोजित तीन दिवसीय खुशवंत सिंह लिट फेस्ट 2026 का रविवार को समापन हो गया। इस महोत्सव में प्रतिष्ठित लेखकों, पत्रकारों और विचारकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सैन्य इतिहास, कला, उद्यमिता, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और साहित्य सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
समापन दिवस की शुरुआत संदीप सिंह की संगीतमय प्रस्तुति से हुई। इसके बाद ‘जनरल सुंदरजी: प्रशंसित या विवादित’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने प्रख्यात पत्रकार सुनेत्रा चौधरी के साथ बातचीत की। जनरल सुंदरजी को अपने समय से आगे की सोच रखने वाला रणनीतिक विचारक बताते हुए दासगुप्ता ने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा, जल्दबाजी और निर्णायक फैसले लेने की प्रवृत्ति के कारण कई बार विवादित निर्णय भी लिए गए।

ऑपरेशन ब्लू स्टार को ‘एक बड़ी प्रशासनिक विफलता’ बताते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ सुंदरजी के सीधे संपर्क में रहने के दौरान स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया। उन्होंने खुफिया तंत्र की विफलताओं और सुरक्षा बलों, नौकरशाही तथा राजनीतिक नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी को भी रेखांकित किया। ऑपरेशन ब्रासटैक्स पर चर्चा करते हुए दासगुप्ता ने कहा कि सुंदरजी पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को परखना चाहते थे, लेकिन उनकी इस कोशिश ने भारत को एक खतरनाक स्थिति की ओर धकेल दिया था।
महोत्सव में प्रख्यात कलाकार सतीश गुजराल के जीवन और विरासत पर भी चर्चा की गई। इस सत्र में अमन नाथ और फिरोज गुजराल शामिल हुए। गुजराल की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित इस चर्चा में चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही उनके विशिष्ट व्यक्तित्व, व्यक्तिगत संबंधों और उनकी जीवन यात्रा को दर्ज करने में खुशवंत सिंह की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
कॉरपोरेट योगी: वक्ता से सीईओ तक का सफर
पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अरविंद लाल ने ‘कॉरपोरेट योगी: फ्रॉम स्पीकर टू सीईओ’ सत्र में सेरेना जैकब के साथ बातचीत की। उन्होंने वर्ष 1977 की उस पारिवारिक त्रासदी के बारे में बताया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी थी। पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान पिता के निधन के कारण उन्हें दिल्ली लौटना पड़ा और वर्ष 1949 में स्थापित पारिवारिक प्रयोगशाला की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। बाद में उन्होंने इसी प्रयोगशाला को डॉ. लाल पैथलैब्स के रूप में विकसित किया। अपनी पुस्तक ‘कॉरपोरेट योगी: माई जर्नी ऐज ए स्पिरिचुअल सीकर एंड एन एक्सीडेंटल एंटरप्रेन्योर’ के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने व्यक्तिगत नुकसान, कारोबारी जिम्मेदारी और आध्यात्मिक खोज के बीच के संबंधों पर विचार रखे।
पर्यावरण और सादगीपूर्ण जीवन पर जोर
‘स्लो डाउन, यू मूव टू फास्ट’ सत्र में श्रेया जानी ने गर्गी रावत के साथ बातचीत की। वंदना शिवा के साथ सह-लेखन में तैयार अपनी पुस्तक ‘स्लो लिविंग: व्हाट यू कैन डू अबाउट क्लाइमेट चेंज’ के संदर्भ में जानी ने बताया कि उपभोक्ताओं की पसंद, विशेषाधिकार और अस्थिर जीवनशैली किस तरह व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। उन्होंने नौ वर्ष की उम्र से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने और 13 वर्ष की उम्र में अत्यधिक मानसिक व शारीरिक थकान का अनुभव करने का जिक्र किया।
उन्होंने व्यक्तिगत सीमाओं को पहचानने और जीवन को अधिक सजगता व संतुलन के साथ जीने के महत्व पर जोर दिया। महोत्सव के साहित्यिक सत्रों में शिनी एंटनी और सत्यजीत सामंत ने ‘घूल्स एंड गुड रीड्स’ विषय पर चर्चा की। ‘आफ्टर खुशवंत्स हार्ट: द डेब्यूटेंट्स’ सत्र में देवकी पांडे, शोभा श्रॉफ और डॉ. जतिंदर परवाज ने हिस्सा लिया और उभरती साहित्यिक प्रतिभाओं को सामने रखा।
वहीं, अखिल गुप्ता के सत्र ‘क्लोजिंग: द हैप्पीनेस लैब’ में दर्शकों को खुशहाली और जीवन को अधिक सोच-समझकर जीने के तरीकों पर विचार करने का अवसर मिला। महोत्सव के निदेशक और खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह तथा मधुर सिंह ने समापन पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने वक्ताओं और दर्शकों की भागीदारी के लिए आभार जताया। अंत में रेने सिंह की प्रस्तुति ‘बियॉन्ड द लास्ट पेज: केएसएलएफ सॉन्ग टू रिमेंबर’ के साथ विचारों, साहित्य और जीवंत बहसों के तीन दिवसीय आयोजन का समापन हुआ।



















