Khushwant Singh Lit Fest 2026: ऐतिहासिक कसौली क्लब में आयोजित खुशवंत सिंह लिट फेस्ट के 15वें संस्करण का दूसरा दिन संगीत, विचारों, संवादों और कहानियों से भरा रहा। दूसरे दिन “ए मेलोडियस प्रीफेस: म्यूज़िकल स्टोरीटेलिंग, दास्तान-ए-गुरु नानक”, “मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज़”, “मणिपुर: स्टोरीज़ द फ़ायर कुड नॉट बर्न”, “नो फुल स्टॉप्स फॉर टुली साहिब”, कीनोट “द आर्ट ऑफ़ डिसएग्रीमेंट”, “ए जनरल एंड ए स्पाई: द कश्मीर फ़ाइल्स”, “द हिमालयाज़: क्लियर एंड प्रेज़ेंट डेंजर”, “स्काई वॉरियर्स”, “द फाउंडर्स ऑफिस विद सार्थक आहूजा”, “मी एंड मां” और “लाफ्टर, टियर्स एंड भेजा फ्राई” जैसे विषयों पर आयोजित सत्रों में चर्चा हुई।
“मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज” पर आयोजित सत्र में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) ने किशलय भट्टाचार्जी के साथ बातचीत में कहा कि केवल AFSPA को हटा देने से संघर्ष खत्म नहीं होगा, बल्कि इसके मूल कारणों को सुलझाना जरूरी है। नागरिकों और सेना के बीच बदलते रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में जो लोग कभी सेना की गाड़ियां देखकर भाग जाते थे, वे अब खुद सैनिकों के पास जाकर उनका अभिवादन करते हैं, जो सेना के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। नरवणे ने अपनी किताबों, ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ और ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ के साथ-साथ अपनी आने वाली अगली किताब पर भी चर्चा की।

वहीं, शिक्षाविद और सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंग्मो ने केंद्र सरकार पर लद्दाख के साथ ‘सौतेले व्यवहार’ का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक उपेक्षा के कारण बेतहाशा खनन और भू-माफियाओं को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे इस क्षेत्र के नाजुक पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया है। ‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट’ सत्र के दौरान सुनेत्रा चौधरी से बातचीत में आंग्मो ने कहा कि हालांकि वह और सोनम वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संपर्क में हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव के लिए केवल किसी मंत्री के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि व्यापक सामाजिक और शैक्षिक सुधारों की आवश्यकता है।
धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के सहिष्णुता और करुणा के सिद्धांतों को गलत तरीके से पेश किया गया है। भारत के ‘विश्वगुरु’ होने के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाने और बांटने वाली राजनीति को खत्म करने की मांग की। उन्होंने आगे कहा कि ‘जेन जेड’ (Gen Z) अब तेजी से जाति और धर्म के बंटवारे से ऊपर उठकर मानवता, समावेशिता और करुणा को प्राथमिकता दे रही है।
ऑनलाइन सत्र में शामिल हुए इनोवेटर सोनम वांगचुक ने कहा, “लद्दाख को बचाना भारत को बचाना है।” सत्र के दौरान पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा और पूर्व नौकरशाह अवय शुक्ला ने हिमालय के बिगड़ते पारिस्थितिक संकट के प्रति आगाह किया। उन्होंने अनियंत्रित खनन, अत्यधिक निर्माण कार्य और जलवायु परिवर्तन की ओर ध्यान दिलाते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील विकास और स्थानीय लोगों की अधिक भागीदारी की वकालत की।
‘ए जनरल एंड ए स्पाई: द कश्मीर फाइल्स’ नामक सत्र में RAW के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत ने ‘धुरंधर’ को प्रोपेगैंडा (प्रचार) करार दिया। पत्रकार सुनेत्रा चौधरी के साथ बातचीत में दुलत और मेजर जनरल रंजन महाजन ने कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकताओं और वहां शांति की संभावनाओं पर चर्चा की। दुलत ने पाकिस्तान के बजाय कश्मीरियों के साथ बातचीत करने पर जोर दिया। दोनों वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि केवल ताकत के इस्तेमाल से इस मुद्दे को हल नहीं किया जा सकता; स्थायी शांति के लिए समानता और बातचीत जरूरी है।
KSLF 2026 में वीणा नरवणे और जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) ने छात्रों के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने दु:ख, विपरीत परिस्थितियों से उबरने की क्षमता (रेज़िलिएंस) और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की। वीणा ने बताया कि कैसे बच्चों की कहानियां युवा पाठकों को किसी नुकसान या दुख से उबरने में मदद करती हैं। वहीं, जनरल नरवणे ने छात्रों को चुनौतियों का सामना करने, गलतियों से सीखने और अनुशासन व आत्मविश्वास विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
‘डिस्ट्रोपिया इन एन AI वर्ल्ड’ (AI की दुनिया में एक भयावह भविष्य) नामक सत्र में मंदिरा शाह ने छात्रों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया कि AI का रचनात्मकता, निजता (प्राइवेसी) और स्वतंत्र सोच पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
पर्यावरण पत्रकार बहार दत्त और लेखिका निखिता सिंह ने KSLF 2026 में सस्टेनेबल लिविंग (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली), जिम्मेदार पर्यटन और संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। बहार दत्त ने पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि निखिता सिंह ने बताया कि कैसे लोक कथाएं और पारंपरिक कलाएं पर्यावरण के प्रति जागरूकता जगा सकती हैं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा कर सकती हैं।
‘इट्स टीन टाइम, ब्रो’ नामक सत्र में लेखिका पूजा पोद्दार मारवाह ने शाइनी एंटनी के साथ बातचीत करते हुए माता-पिता और किशोर बच्चों के बीच होने वाले टकरावों पर चर्चा की। उन्होंने रोजमर्रा के पारिवारिक मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग पीढ़ियों के बीच की खाई को पाटने के लिए सहानुभूति, खुलकर बातचीत करना और एक-दूसरे का सम्मान करना बहुत जरूरी है।
KSLF 2026 में ‘इंडिया अनप्लग्ड: गवर्नेंस फॉर ग्रोथ’ सत्र के दौरान राजीव बुद्धिराजा और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (रिटायर्ड) ने गवर्नेंस में सुधार और भारत की विकास संभावनाओं पर चर्चा की। बुद्धिराजा ने संस्थागत बाधाओं और जवाबदेह नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि शुक्ला ने रक्षा आधुनिकीकरण, AI और डीप टेक्नोलॉजी में निवेश, तथा स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की बात कही।
अन्य प्रमुख सत्रों में ‘द फाउंडर्स ऑफिस’ शामिल था, जिसमें सार्थक आहूजा ने सैम टली के साथ बातचीत की; अभिनेत्री दिव्या दत्ता के साथ ‘मी एंड मां’; और ‘मणिपुर: स्टोरीज द फायर कुड नॉट बर्न’ सत्र, जिसमें होइहनु हाउज़ेल ने प्रीति गिल के साथ चर्चा की। इसके अलावा, ‘नो फुल स्टॉप्स’ नामक सत्र में गिलियन राइट, सैम टली और हरतोष सिंह बल ने रेखा खन्ना के साथ बातचीत की।



















