Dragon Fruit Farming: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में कभी एक नए और प्रयोगात्मक प्रयास के रूप में शुरू हुई ड्रैगन फ्रूट की खेती ने अब अपनी मजबूत और स्थायी पहचान बना ली है। कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए इस साल जिले में अब तक ड्रैगन फ्रूट की 11.2 मीट्रिक टन की रिकॉर्ड और बंपर पैदावार दर्ज की गई है।
वर्तमान में ऊना के करीब छह हेक्टेयर क्षेत्र में इस पौष्टिक फल की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। स्थानीय मंडियों और बाजारों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक यहां के ड्रैगन फ्रूट की जबरदस्त मांग बनी हुई है। फल की उच्च गुणवत्ता और बाजार में मिल रहे बेहतर दामों ने ड्रैगन फ्रूट उत्पादक बागवानों के चेहरों पर खुशी ला दी है।
इस चालू सीजन में बागवानों को 80 से 100 रुपये प्रति फल तक का शानदार भाव मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले सालों तक यही फल बाजार में करीब 50 रुपये तक बिकता था। दामों में आए इस उछाल और सीधे ग्राहकों तक पहुंच ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की है। जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ यह फसल सीजन आगामी दिसंबर-जनवरी तक चलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ऊना जिले के विभिन्न क्षेत्रों जैसे लोअर बढ़ेड़ा, सलोह, पंजावर, पीपली, गुगलैहड़, कलोह, अंब, बदमाणा, चिंतपूर्णी और लोहारली में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से फैल रही है। शुरुआत के दिनों में किसानों को उत्पादन तकनीकों और पौधों की सही देखभाल को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, बागवानी विभाग के मार्गदर्शन, उचित पोषण प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के माध्यम से अब उत्पादन में निरंतर सुधार देखा जा रहा है।
जिले के कई किसान इस खेती से प्रेरणादायक सफलता प्राप्त कर रहे हैं। अंब के आदर्श नगर निवासी बागवान मुस्ताक गुज्जर ने वर्ष 2018 में मात्र तीन कनाल भूमि पर पौधे लगाकर खेती शुरू की थी, जिससे उन्हें पांच से छह क्विंटल उत्पादन मिला था। आज वे लगभग 13 कनाल क्षेत्र में खेती कर रहे हैं और इस सीजन में जून से अब तक करीब 45 क्विंटल का बंपर उत्पादन ले चुके हैं। स्थानीय स्तर पर अत्यधिक मांग होने के कारण उनका पूरा स्टॉक तैयार होने से पहले ही बिक जाता है।
इसी तरह बागवान रीवा सूद ने वर्ष 2017 में लगभग दो हजार पौधों के साथ शुरुआत की थी। मेहनत और सही प्रबंधन के बल पर आज उनके खेतों में करीब 30 हजार पौधे लहलहा रहे हैं। इस सीजन में वे अब तक ढाई टन ड्रैगन फ्रूट बाजार में बेच चुकी हैं, जिसमें उन्हें प्रति फल 80 से 100 रुपये तक के बेहतरीन दाम मिले हैं। उनके ड्रैगन फ्रूट की मांग स्थानीय बाजार के अलावा दिल्ली में भी काफी बनी हुई है।
बदोली के किसान विवेक जोशी ने भी लगभग दो वर्ष पहले 100 पौधों के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की थी। वे बताते हैं कि शुरुआत में तकनीक और सटीक जानकारी के अभाव में काफी मुश्किलें आईं, लेकिन अब प्रति पौधा लगभग एक किलो का उत्पादन मिल रहा है और फसल की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है।
उपनिदेशक बागवानी डॉ. केके भारद्वाज का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट अपनी अनूठी बनावट, स्वाद और भरपूर एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के कारण उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने बताया कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए बागवानों को प्रति हेक्टेयर 3.37 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ऊना जिले में इसके रकबे और कुल उत्पादन दोनों में भारी बढ़ोतरी की संभावना है।
ड्रैगन फ्रूट एक बारहमासी पौधा है, जो उचित रखरखाव और देखभाल मिलने पर 15 से 20 वर्ष या उससे भी अधिक समय तक लगातार फल दे सकता है। इसकी खेती के लिए सिंचाई की ड्रिप प्रणाली बेहद उपयोगी मानी जाती है। पौधों को संतुलित पोषण और जैविक खाद देना अनिवार्य है। आमतौर पर एक पोल पर चार पौधों को सहारा देकर लगाया जाता है, और पशुओं से सुरक्षा के लिए मजबूत फेंसिंग आवश्यक है। ताजा खाने के अलावा इसका उपयोग जैम, जेली, आइसक्रीम, जूस और नेक्टर जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों में भी किया जा रहा है।


















