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भोजपुरी कमेंट्री पर क्या बोले रविकिशन?

Published on: 2 April 2023
IPL Bhojpuri Commentary

IPL Bhojpuri Commentary: आईपीएल 2023 में भोजपुरी कमेंट्री चर्चा में बनी हुई है। आईपीएल की कमेंट्री न केवल हिंदी और अंग्रेजी बल्कि भोजपुरी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी की जा रही है। आईपीएल भोजपुरी कमेंट्री की कमान रविकिशन ने संभाली है जो गोरखपुर से भाजपा के सांसद हैं और भोजपुरी समेत अन्य भाषाओं में एक्टिंग भी करते हैं। बता दें कि बिहार और खासकर पूर्वी यूपी में भोजपुरी लोकप्रिय भाषा है।

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए रवि किशन ने कहा कि मैं बहुत बड़ा क्रिकेट प्रशंसक हूं और भोजपुरी टीम के साथ खेलता भी हूं, जहां मेरे साथी सांसद मनोज तिवारी और अन्य भी खेलते हैं। खेल की बारीकियां मेरे खेलने के अनुभव के साथ स्वाभाविक रूप से मेरे पास आती हैं। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में भोजपुरी कमेंट्री मुझे इस खेल के और पास लाती है।

रविकिशन बोले- देश में 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते और समझते हैं

गोरखपुर सांसद ने कहा कि देश भर में करीब 25 करोड़ लोग हैं, जो भोजपुरी बोलते और समझते हैं। यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपनी मातृभाषा के प्रचार के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं, योगदान करूं। बता दें कि इस साल आईपीएल कुल 12 भाषाओं में उपलब्ध है। अंग्रेजी और हिंदी के अलावा क्रिकेट फैंस अब भोजपुरी, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ पंजाबी, गुजराती, मराठी और बंगाली में कमेंट्री सुन सकते हैं।

अभिनेता से राजनेता बने रविकिशन ने कहा कि आईपीएल में भोजपुरी कमेंट्री पर मुझे जो प्रतिक्रिया मिली है वह अभूतपूर्व है और मुझे प्यार करने वाले प्रशंसकों के फोन आए हैं। मुझे खुशी है कि भोजपुरी कमेंट्री की टीआरपी रेटिंग शीर्ष पर रही है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी में कमेंट्री मेरी मातृभाषा के लिए मेरा प्यार है।

2019 में पहली बार सांसद बने हैं रविकिशन

फिल्मों में बेहद सफल करियर के बाद राजनीति में एंट्री करने वाले रविकिशन अक्सर संसद में भोजपुरी फिल्म उद्योग के बेहतरी के लिए मुद्दों को उठाया है। 2019 में पहली बार संसद सदस्य बनने के कुछ ही समय के भीतर ही उन्होंने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की थी।

बता दें कि संविधान की आठवीं अनुसूची में असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथिली और डोगरी जैसी 22 भाषाएं शामिल हैं। अन्य 38 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है।

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