Income Tax Slab Calculation 2026: वित्त वर्ष 2026 में अपनी कर देनदारी का आकलन कर रहे करदाताओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए इनकम टैक्स के पेचीदा नियमों को समझना अनिवार्य है। हाल ही में टैक्स स्लैब और कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) के समायोजन को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। Upstock की एक रिपोर्ट के मुताबिक बलवंत जैन के अनुसार, कर गणना की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन सी टैक्स व्यवस्था (ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम) चुनी है।
कैपिटल गेन्स और टैक्स स्लैब का गणित
वरिष्ठ नागरिकों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि लिस्टेड शेयर्स की बिक्री से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर टैक्स की दरें तय होती हैं। वर्तमान नियमों के तहत, लिस्टेड शेयर्स पर LTCG पर 12.50% और STCG पर 20% की फ्लैट दर से कर लगता है।
चूँकि इन पर टैक्स की दरें पहले से निर्धारित (फ्लैट) हैं, इसलिए टैक्स स्लैब निर्धारित करते समय इन्हें सामान्य आय से अलग रखा जाता है। आपकी कुल आय (Gross Income) में से इन कैपिटल गेन्स को हटाकर ही यह देखा जाता है कि आप किस टैक्स स्लैब के दायरे में आते हैं।
चैप्टर VIA की कटौती और सीमाएं
आयकर अधिनियम के चैप्टर VIA के तहत मिलने वाली कटौतियां, जैसे कि सेक्शन 80C, 80D, 80G और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष 80TTB, केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में ही उपलब्ध हैं। यदि आप नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो ये लाभ आपको नहीं मिलेंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन कटौतियों का लाभ लिस्टेड शेयर्स से होने वाले LTCG या STCG के विरुद्ध नहीं लिया जा सकता। आपकी कटौती का दावा केवल ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from other sources) तक ही सीमित रहेगा। यदि आपकी सामान्य आय इन कटौतियों के बाद मूल छूट सीमा (Exemption Limit) से नीचे चली जाती है, तो उस कमी (Shortfall) को कैपिटल गेन्स के साथ एडजस्ट किया जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा
टैक्स व्यवस्था के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए मूल छूट की सीमा अलग-अलग है। 60 से 80 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए पुरानी व्यवस्था में 3 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है। वहीं, नई टैक्स व्यवस्था में उम्र की परवाह किए बिना यह सीमा 4 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
एडवांस टैक्स और आईटीआर फाइलिंग
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत यह है कि यदि उनके पास व्यवसाय से कोई आय (Business Income) नहीं है, तो उन्हें एडवांस टैक्स जमा करने की आवश्यकता नहीं होती। आप अपनी कर देनदारी का भुगतान इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ब्याज और जुर्माने से बचने के लिए नियत तारीख (Due Date) तक अपना आईटीआर अवश्य भरें। समय पर रिटर्न दाखिल न करने की स्थिति में न केवल कर देनदारी पर ब्याज देना होगा, बल्कि देरी से फाइलिंग का शुल्क भी वहन करना पड़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे प्रजासत्ता की ओर से निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। कृपया कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।




















