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बाबा बालक नाथ मंदिर में चांदी हेराफेरी की अफवाहों पर प्रशासन का बड़ा खुलासा

Hamirpur News: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध दियोटसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ावे की चांदी में गड़बड़ी की खबरों को मंदिर न्यास अध्यक्ष ने सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित हैं।
hamirpur Baba Balak Nath Temple silver controversy: बाबा बालक नाथ मंदिर में चांदी हेराफेरी की अफवाहों पर प्रशासन का बड़ा खुलासा

Baba Balak Nath Temple Silver Controversy: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध दियोटसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद, देवभूमि के इस प्रतिष्ठित मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चांदी के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और धांधली को लेकर विभिन्न मीडिया माध्यमों में खबरें प्रकाशित हुई थीं।

इन खबरों पर अब मंदिर न्यास की अध्यक्ष एवं हमीरपुर की उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ का एक बड़ा और आधिकारिक बयान सामने आया है। न्यास अध्यक्ष ने इन सभी खबरों का कड़े शब्दों में खंडन किया है। मंदिर न्यास की अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ ने मीडिया में चल रही खबरों को पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार बताते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

उन्होंने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा है कि बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई चांदी में किसी भी प्रकार की कोई धांधली, अनियमितता या हेराफेरी नहीं हुई है। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई चांदी का एक-एक ग्राम का पूरा रिकॉर्ड पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है और इसकी नियमानुसार सही तरीके से एंट्री भी की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड में आए अंतर के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2022 में मंदिर का एक विस्तृत ऑडिट किया गया था। इस ऑडिट प्रक्रिया के दौरान यह बात सामने आई थी कि मंदिर के ऑनलाइन रिकॉर्ड में चांदी की एंट्री 110 ग्राम दर्ज दिखाई दे रही थी, जबकि इसके विपरीत जब भौतिक रूप से स्टॉक रजिस्टर की जांच की गई, तो उसमें चांदी की मात्रा 11 ग्राम दर्ज पाई गई थी। दोनों रिकॉर्ड्स के बीच इस प्रकार का अंतर सामने आने के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया था।

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ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में चांदी की मात्रा का यह अंतर सामने आने के तुरंत बाद मंदिर प्रशासन द्वारा संबंधित मंदिर अधिकारी से इस विषय पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था। मंदिर अधिकारी ने प्रशासन को सौंपे गए अपने आधिकारिक जवाब में स्पष्ट किया था कि यह विसंगति किसी प्रकार की हेराफेरी के कारण नहीं, बल्कि केवल एक क्लेरिकल मिस्टेक की वजह से हुई थी। रिकॉर्ड दर्ज करते समय हुई इस मानवीय चूक के कारण ही दोनों आंकड़ों में यह अंतर दिखाई दे रहा था।

उपायुक्त ने आगे बताया कि इस स्पष्टीकरण के बाद मामले की पूरी गहनता से जांच की गई और सभी संबंधित रिकॉर्ड का आपस में बारीकी से मिलान किया गया। इस विस्तृत जांच प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाई गई चांदी पूरी तरह से सुरक्षित थी। वास्तविक स्टॉक में चांदी की मात्रा में किसी भी प्रकार की कोई कमी, हेराफेरी या गड़बड़ी नहीं पाई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि चढ़ावे की वास्तविक मात्रा बिल्कुल सही थी और केवल रिकॉर्ड दर्ज करने में ही त्रुटि हुई थी, जिसके कारण चांदी की हेराफेरी से जुड़ी खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

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भविष्य में इस प्रकार की किसी भी तकनीकी त्रुटि या भ्रांति को रोकने के लिए मंदिर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मंदिर न्यास के अध्यक्ष ने बताया कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक नई एसओपी को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस नई एसओपी के अंतर्गत अब मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना करने के लिए दो अलग-अलग केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन दो केंद्रों के माध्यम से पूरी गणना प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और पूरी तरह पारदर्शी रहेगी।

इसके अतिरिक्त, चढ़ावे की गणना के दौरान सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व मजबूत करने के लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या को भी बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। नई व्यवस्था के तहत गणना प्रक्रिया में शामिल होने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही और जिम्मेदारियां भी लिखित रूप में स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से भविष्य में किसी भी प्रकार की भ्रांति, भ्रम या विवाद की स्थिति उत्पन्न होने की कोई संभावना नहीं बचेगी।

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हमीरपुर की उपायुक्त एवं मंदिर न्यास अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ ने अंत में देश-विदेश के श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील भी की है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और विश्वास को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पूरी निष्ठा और पूर्ण पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है।

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