Himachal Politics: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं और सरकार राजनीतिक प्रतिशोध व बदले की भावना से काम कर रही है। शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पौने चार साल का कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन विकास के नाम पर राज्य में केवल संस्थानों को बंद करने और विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित करने का काम हुआ है।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में राज्य में एक नया और नकारात्मक प्रशासनिक कल्चर शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के माध्यम से जनता कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है। हाल ही में हुए स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज चुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के 10 में से 9 जिलों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार निर्विरोध अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए हैं। अपनी घटती लोकप्रियता और असफलता से बौखलाकर सरकार अब विरोध में उठने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर बड़ा तंज कसते हुए कहा कि “बदलापुर राज्य बन गया हिमाचल!”

बीजेपी नेताओं पर दर्ज किए जा रहे झूठे मामले
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि चुने हुए प्रतिनिधियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाकर उन पर जबरन आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी, धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, पूर्व विधायक होशियार सिंह, आशीष शर्मा, रवि ठाकुर और देवेंद्र भुट्टो समेत कई नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि सरकार इन नेताओं के खिलाफ विजिलेंस और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच रिपोर्ट आने के बावजूद मुख्यमंत्री के दबाव में नई टीमें बनाकर नेताओं के घरों और संपत्तियों का आकलन कराया जा रहा है।
प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग और फोन टैपिंग का दावा
जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर पुलिस और प्रशासनिक ढांचे को पंगु बनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पूर्णकालिक मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति करने के बजाय एडिशनल चार्ज के सहारे शासन चलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद डीजीपी का पैनल केंद्र सरकार को नहीं भेजा जा रहा है, ताकि अपनी मर्जी के अधिकारियों से मनमाफिक काम कराया जा सके।
उन्होंने आगे दावा किया कि विपक्ष के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की जीपीएस और पीएसओ के जरिए लोकेशन ट्रेस की जा रही है और रात-रात भर बैठकर अधिकारियों द्वारा फोन टैपिंग कराई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो अधिकारी सरकार के दबाव में आकर नियम-कायदों का उल्लंघन कर रहे हैं, भविष्य में सत्ता परिवर्तन होने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक घपलों को उजागर करने के लिए एक विस्तृत चार्जशीट तैयार कर रही है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध, शिमला में हत्याएं और बिलासपुर में गोलीकांड जैसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, नशे के बढ़ते चलन और सुशासन से जुड़े मुद्दों पर सरकार को मजबूती से घेरेगी। उन्होंने ऐलान किया कि सत्ता में वापस आने पर भाजपा पहली ही कैबिनेट बैठक में बदले की भावना से दर्ज किए गए सभी झूठे मुकदमों को निरस्त करेगी।
“या सीएम बदलो या काम का तरीका…” रजनी पाटिल की रिपोर्ट का हवाला देकर जयराम ठाकुर का बड़ा दावा
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रत्रकार वार्ता में बड़ा दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और पार्टी के कई नेता अपनी ही सरकार के कामकाज से नाराज़ हैं। ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों पर लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की बातें कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर हालात अलग हैं। “उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल द्वारा पार्टी नेतृत्व को सौंपी गई रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के कार्य करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि या तो मुख्यमंत्री अपने कामकाज का तरीका बदलें या फिर मुख्यमंत्री को ही बदल दिया जाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भविष्य की योजनाएं और राजनीतिक भविष्यवाणियां कर रहे हैं, जबकि उनकी अपनी पार्टी के भीतर ही असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी सरकार की कार्यशैली से असहज हैं और उनका “दुख” अब सार्वजनिक होने लगा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच समन्वय की कमी दिखाई दे रही है, जिसका असर राजनीतिक माहौल पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सीएम पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हाल ही में हुए स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के नतीजे भी कांग्रेस सरकार के प्रति जनता की नाराज़गी का संकेत देते हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। जयराम ठाकुर ने कहा, “मुख्यमंत्री खुद कहते हैं कि भाजपा के विधायक उनके संपर्क में हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनका पूरा ध्यान कांग्रेस के भीतर अपने विरोधियों को निपटाने पर है। बहुतों को तो वे पहले ही निपटा चुके हैं और जो कुछ लोग अभी बचे हैं, उन्हें भी किनारे लगाने की कोशिश की जा रही है।”
‘अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति मांग रहे, भ्रष्टाचार में लिप्त चहेतों को एक्सटेंशन दे रही सरकार’
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में सरकार की कार्यशैली से वरिष्ठ अधिकारी भी असहज हैं और कई अधिकारी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने का अनुरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदारी से काम करने की गुंजाइश नहीं बची है। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि कई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं उनसे मिलकर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने का आग्रह कर चुके हैं। उनके अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में कार्य संस्कृति प्रभावित हो चुकी है और मौजूदा माहौल में निष्पक्ष तरीके से काम करना मुश्किल हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर अपने पसंदीदा अधिकारियों को सेवा विस्तार देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि किसी अधिकारी को एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा, लेकिन बाद में उसी दिन कुछ अधिकारियों को सेवा विस्तार दे दिया गया। उनके मुताबिक इससे सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखाई देता है। जयराम ठाकुर ने कहा कि जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, उन्हें भी लगातार संरक्षण और सेवा विस्तार दिया जा रहा है, जबकि ईमानदार अधिकारी प्रदेश छोड़कर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्रशासनिक कार्यशैली के कारण शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।


















