Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश में मानसून अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर के आखिरी सप्ताह में राज्य से मानसून के पूरी तरह विदा होने की प्रबल संभावना जताई गई है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां बेहद कमजोर रहने का अनुमान है। हालांकि, विदाई से ठीक पहले प्रदेश के मौसम के मिजाज में मिला-जुला बदलाव देखने को मिल रहा है।
शुक्रवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह साफ रहा। राजधानी शिमला, आसपास के क्षेत्रों और प्रमुख पर्यटन स्थल मनाली में सुबह से ही गुनगुनी धूप खिली रही। दूसरी ओर, चंबा जिले के ऊंचाई वाले प्रसिद्ध पर्यटन स्थल साच पास पर देर रात करीब छह इंच ताजा हिमपात दर्ज किया गया। बर्फबारी के चलते साच पास मार्ग को आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने आम जनता और पर्यटकों से अपील की है कि जब तक मार्ग पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता, तब तक साच पास की ओर यात्रा करने से बचें।
उच्च पर्वतीय इलाकों में हुई इस बर्फबारी के बाद पूरे प्रदेश में ठंड का असर बढ़ने लगा है। शुक्रवार को राज्य का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश भी दर्ज की गई है। शिमला जिले के सुन्नी भज्जी क्षेत्र में सबसे अधिक 33.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
इसके अतिरिक्त एएमएफयू सेओबाग में 19 मिलीमीटर, मनाली में 17 मिलीमीटर, भुंतर में 14.4 मिलीमीटर, कोठी में 11.6 मिलीमीटर, पंडोह में 11 मिलीमीटर और रामपुर में 10.4 मिलीमीटर बारिश हुई। कांगड़ा और शिमला के कुछ इलाकों में गरज के साथ बिजली चमकने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जबकि ताबो में 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 19, 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर को भी प्रदेश के कुछ स्थानों पर गर्जन और चमक के साथ हल्की वर्षा की संभावना बनी रहेगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस अवधि के दौरान राज्य में किसी भी स्थान के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की शुक्रवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 73 सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हैं। इसके अलावा 17 बिजली ट्रांसफार्मर और दो प्रमुख पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी ठप पड़ी हुई हैं। आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी जिला रहा है, जहां 46 सड़कें और 16 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं। इसके अलावा कांगड़ा जिले में 10 और कुल्लू जिले में नौ सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हैं। लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां बंद सड़कों और बाधित सेवाओं को बहाल करने में जुटी हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने 30 जून को प्रवेश किया था। आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के बावजूद, प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य में चल और अचल संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। इस मानसून सीजन में कुल मिलाकर करीब 3,212 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान आंका गया है। इसमें सबसे बड़ा झटका लोक निर्माण विभाग को लगा है, जिसे सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से 2,744 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
मानसून के दौरान राज्य में कुल 319 लोगों ने अपनी जान गंवाई है, 544 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और चार लोग अभी भी लापता हैं। मृतकों में से 191 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई, जबकि 128 लोगों की जान भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, डूबने, बहने और फिसलने जैसे बारिश जनित हादसों के कारण गई। संपत्ति के नुकसान में 134 मकान, 17 दुकानें और 482 पशुशालाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं, जबकि 512 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।


















