Himachal Samagra Shiksha Budget 2026: केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में आयोजित ‘प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड’ (PAB) की उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के लिए ‘समग्र शिक्षा’ अभियान के तहत 720 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। यह बजट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र ने इस चालू वित्त वर्ष के लिए बजट की अधिकतम सीमा 746 करोड़ रुपये तय की थी, जबकि आगामी वर्ष के लिए दी गई राशि इससे कम है।
शिक्षा क्षेत्र के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से आवंटित इस राशि में पिछले वर्षों की तुलना में क्रमिक गिरावट देखी गई है। अगर पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें, तो केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल के लिए बजट की ऊपरी सीमा 754 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। इस बार स्वीकृत 720 करोड़ रुपये की राशि राज्य की शैक्षणिक योजनाओं के कार्यान्वयन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजेश शर्मा ने बैठक के बाद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य ने पिछले वर्ष आवंटित किए गए शत-प्रतिशत बजट का सफलतापूर्वक उपयोग किया था और विभाग ने अपने सभी निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा कर लिया था। इसी प्रदर्शन को आधार बनाकर राज्य सरकार की ओर से केंद्र के समक्ष अधिक बजट आवंटन की मांग रखी गई थी।
राजेश शर्मा के अनुसार, हालांकि वर्तमान में 720 करोड़ रुपये की ही स्वीकृति मिली है, लेकिन केंद्र ने राज्य की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “हमने बैठक में पिछले साल के बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर अधिक परिव्यय (outlay) की मांग की थी। हमें केंद्र की ओर से बताया गया है कि हमारी अतिरिक्त बजट की मांग पर ‘अनुपूरक बजट’ (Supplementary Budget) के दौरान गंभीरता से विचार किया जाएगा।”
उल्लेखनीय है कि ‘समग्र शिक्षा’ के तहत मिलने वाली यह धनराशि मुख्य रूप से राज्य के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर खर्च की जाती है। इसमें नए भवनों का निर्माण, मरम्मत और आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को बढ़ावा देने और प्री-प्राइमरी शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए भी इस बजट का एक बड़ा हिस्सा उपयोग में लाया जाता है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बजट की ऊपरी सीमा में भले ही कमी आई हो, लेकिन अनुपूरक बजट से उम्मीदें बरकरार हैं। राज्य का मुख्य ध्यान अब प्री-प्राइमरी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विस्तार पर है, ताकि छात्रों को जमीनी स्तर पर बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें। केंद्र द्वारा तय किए गए इस बजट ढांचे के भीतर ही अब आगामी वित्त वर्ष की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
















