Himachal News: हिमाचल प्रदेश में अब बिजली बनाने वाली परियोजनाओं को भी जमीन के बदले सरकार को भू-राजस्व देना होगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसकी घोषणा की थी और गुरुवार को राजस्व विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इस नए नियम से राज्य की कमाई बढ़ेगी और विकास के कामों के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा।
बता दें कि इस समय राज्य में कुल 191 विद्युत परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें चंबा जिले में सबसे ज्यादा 45 परियोजनाएं हैं, जबकि सोलन में सिर्फ एक परियोजना है। यह शुल्क सभी परियोजनाओं पर लगेगा, चाहे वे छोटी हों या बड़ी। छोटे प्रोजेक्ट्स पर 1 प्रतिशत और बड़ी परियोजनाओं पर औसत बाजार मूल्य का 2 प्रतिशत भू-राजस्व लगेगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह फैसला राज्य के वित्तीय हालात को मजबूत करने के लिए जरूरी है। केंद्र सरकार से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) अब बंद हो रहा है, इसलिए राज्य को अपने संसाधनों से ही कमाई बढ़ानी होगी। इस शुल्क से मिलने वाला पैसा जनकल्याण योजनाओं और विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
भू-राजस्व की पहली किस्त अप्रैल में और दूसरी अक्तूबर में जमा करनी होगी। वसूली 2 फरवरी 2026 से शुरू होगी। सरकार ने साफ कहा है कि यह शुल्क समय पर जमा करना जरूरी है और पारदर्शी तरीके से वसूली होगी। राजस्व विभाग इसकी पूरी निगरानी करेगा। बिजली परियोजना चलाने वाले कंपनियों का कहना है कि इससे उनकी लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से लंबे समय में सबके लिए फायदा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य और बिजली उत्पादकों के बीच अच्छा संतुलन बनाएगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हिमाचल के विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए यह फैसला बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार का मकसद है कि स्थानीय संसाधनों से ज्यादा राजस्व जुटाकर राज्य आत्मनिर्भर बने।














