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मंडी में AAP का रोड शो करेगा हिमाचल में पार्टी के सियासी भविष्य की दशा-दिशा तय

मंडी में AAP का रोड शो करेगा हिमाचल में पार्टी के सियासी भविष्य की दशा-दिशा तय

प्रजासत्ता|
आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश के तीसरे फ्रंट के रूप में सियासत में एंट्री कर रही है। हिमाचल में धमाकेदार एंट्री के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिले मंडी में आम आदमी पार्टी (AAP) पहला रोड शो कर रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के CM भगवंत मान इसके जरिए हिमाचल में आगामी विधानसभा और नगर निगम शिमला के चुनाव का बिगुल बजाएंगे। AAP के इस रोड शो पर हिमाचल के साथ-साथ पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली व पंजाब के अलावा अन्य राज्यों में भी पार्टी के विस्तार का ऐलान कर चुके हैं।

आम आदमी पार्टी हिमाचल में सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। पार्टी का फोकस पंजाब से लगते हिमाचल के ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर और सोलन जिलों पर है। इसकी वजह ये है कि पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार बन चुकी है, इसका असर पड़ोसी राज्य के इन इलाकों में देखने को मिल सकता है। वहीं कांगड़ा जिले में ही राज्य की सबसे ज्यादा 15 विधानसभा सीटें आती हैं।

आम आदमी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों के कारण हिमाचल में कांग्रेस और भाजपा में भी अंदरखाते हलचल बढ़ गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री के गृह जिले मंडी में होने वाली रैली के मद्देजनर दोनों पार्टियों के कई बड़े चेहरों के छिटकने की चर्चाएं जोरों पर है। रोड शो में पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान की मौजूदगी में कई बड़े नाम AAP से जुड़ सकते हैं।

मंडी के विक्टोरिया पुल से पड्‌डल मैदान तक होने वाले इस रोड शो को लेकर तैयारी पूरी है। रोड शो के लिए प्रदेशभर से कार्यकर्ता मंडी पहुंचने गए हैं।AAP पार्टी हिमाचल में तीसरे विकल्प के तौर पर उभरना चाह रही है। हालांकि अब तक तीसरे विकल्प के तौर पर कई दलों ने उभरने की कोशिश की है, लेकिन कोई भी दल पहाड़ की चढ़ाई नहीं चढ़ पाया है। अब देखना होगा कि AAP का झाड़ू पहाड़ चढ़ने में कितना कामयाब रहता है। आज की रैली से AAP की दशा और दिशा लगभग तय हो जाएगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार AAP यदि प्रदेश की सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो सियासी समीकरण बिगाड़ सकती है। कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर कांग्रेस खुद AAP के चुनाव लड़ने से होने वाले नुकसान को लेकर खुद ही ज्यादा सतर्क है। वहीं पिछले दो सप्ताह में AAP में शामिल हुए अधिकांश लोग कांग्रेस पृष्ठभूमि के रहे हैं। वहीं, हाशिए पर चल रहे कांग्रेस भाजपा के कई बड़े नेताओं में से कौन नेता AAP में आज जुड़ता है या सियासी रूख का इंतजार करता है, यह दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगा।

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