Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के धर्मशाला से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल एक स्कूटी सवार व्यक्ति की टांडा अस्पताल में इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पंचनामे के बाद शव को सड़क पर रखकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने धर्मशाला के प्रमुख चैतड़ू-शीला दाड़ी मार्ग पर स्थित शीला चौक को पूरी तरह से जाम कर दिया, जिससे यातायात घंटों बाधित रहा। इस हादसे के बाद मृतक के परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह अपने पीछे पत्नी, दो छोटी बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं, जिनका इकलौता सहारा अब छिन चुका है।

डॉक्टर पर लगा दुर्घटना का आरोप, परिजनों का दावा- जबरन किया गुमराह
घटना के संदर्भ में स्वजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि यह सड़क दुर्घटना टांडा अस्पताल की एक महिला चिकित्सक की कार से हुई है। हादसे के वक्त कार में उस महिला चिकित्सक के साथ दो अन्य डॉक्टर भी सवार थे।
हादसे के तुरंत बाद घायल को क्षेत्रीय अस्पताल (जोनल अस्पताल) धर्मशाला ले जाया गया था। परिजनों का आरोप है कि वे अपने मरीज को बेहतर इलाज के लिए जोनल अस्पताल से फोर्टिस अस्पताल ले जाना चाहते थे।
हालांकि, कार में सवार तीनों चिकित्सकों ने हस्तक्षेप करते हुए परिजनों से कहा कि वे स्वयं डॉक्टर हैं और मरीज को टांडा अस्पताल ले जाना चाहिए क्योंकि वहां तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है। परिजनों का स्पष्ट दावा है कि डॉक्टरों ने उन्हें गलत जानकारी देकर गुमराह किया, जिससे सही समय पर उचित इलाज मिलने में बाधा उत्पन्न हुई।
त्वरित कार्रवाई, मेडिकल टेस्ट और बच्चों के भविष्य की उठाई मांग
शीला चौक पर धरने पर बैठे परिजनों की मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिया जाए। मृतक की पत्नी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि यदि वह यहां बैठकर केवल आंसू बहाती रहेगी, तो उसके पति और मासूम बच्चों को न्याय कौन दिलाएगा। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्वजनों ने मांग रखी है कि दुर्घटना करने वाली महिला चिकित्सक मृतक की तीनों मासूम संतानों की पढ़ाई और परवरिश का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ले।
इसके साथ ही परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि हादसे के समय गाड़ी चला रही महिला चिकित्सक का तुरंत मेडिकल और अल्कोहल टेस्ट कराया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि वह नशे की हालत में वाहन तो नहीं चला रही थी। परिजनों का कहना है कि जिस प्रकार डॉक्टरों ने उन्हें गुमराह किया, उस आधार पर दुर्घटना करने वाली महिला डॉक्टर के साथ-साथ उन दोनों अन्य डॉक्टरों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।


















