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देशद्रोह कानून की समीक्षा होने तक किसी के खिलाफ FIR नहीं

Published on: 11 May 2022
सुप्रीम कोर्ट, Himachal News,

प्रजासत्ता नेशनल डेस्क|
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशद्रोह कानून के मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से कहा कि वो राजद्रोह कानून के तहत FIR दर्ज करने से परहेज करें। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशद्रोह कानून पर तब तक रोक रहे, जब तक इसका पुनरीक्षण हो। कोर्ट ने कहा है कि राजद्रोह की धारा 124-A में कोई नया केस नहीं दर्ज हो। कोर्ट ने कहा कि जब तक इस कानून की समीक्षा सरकार नहीं कर लेती, इस कानून का इस्तेमाल करना ठीक नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों पर रोक लगा दी है। राजद्रोह में बंद लोग बेल के लिए कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि नई एफआईर होती है तो वह कोर्ट जा सकते हैं। इसका निपटारा जल्द से जल्द कोर्ट करें। चीफ जस्टीस ने कहा है कि केंद्र सरकार कानून पर पुनर्विचार करेगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एसजी ने कहा कि हमने एक प्रस्ताव तैयार किया है। हम एक संज्ञेय अपराध को नहीं रोक सकते जो कि किया जाएगा। लेकिन हमने एक प्रोपोजल तैयार किया है। एफआईआर तभी दर्ज हो, जब एसपी स्तर के अधिकारी या उससे ऊपर के अधिकारी को लगता है कि देशद्रोह का आरोप लगाया जाना चाहिए।

एसजी ने कहा कि आप निर्देश दे सकते हैं कि जमानत के आदेश पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। लेकिन इससे परे एक ऐसे कानून पर बने रहना गलत होगा, जिसकी संवैधानिकता को पहले ही आंका जा चुका है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इसका विरोध जताया।

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