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Lok Sabha Seat Increase: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर होगी 850, मोदी सरकार के नए फॉर्मूले से राज्यों का गणित पूरी तरह बदला

Modi Govt 850 Seats Proposal: केंद्र सरकार ने लोकसभा की क्षमता को 543 से बढ़ाकर 850 करने का बड़ा प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सीटों के नए बंटवारे के साथ महिला आरक्षण को लागू करने का खाका तैयार है।
Published on: 15 April 2026
Lok Sabha Seat Increase: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर होगी 850, मोदी सरकार के नए फॉर्मूले से राज्यों का गणित पूरी तरह बदला

Lok Sabha Seat Increase – नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रख दी है। सरकार ने लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल लंबे समय से प्रतीक्षित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को धरातल पर उतारना है, बल्कि परिसीमन के एक नए युग की शुरुआत करना भी है।

सरकार ने इस महत्वपूर्ण बदलाव से संबंधित विधेयक का ड्राफ्ट सांसदों के साथ साझा कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा सुनिश्चित करने और 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) पर चर्चा होगी।

प्रस्तावित योजना के तहत, कुल 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को आवंटित की जाएंगी, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों के हिस्से में 35 सीटें आएंगी। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो यह बड़े बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

उत्तर प्रदेश का बढ़ेगा दबदबा, राज्यों की नई स्थिति
सीटों के इस नए समीकरण में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें हैं, जो कुल सदन का लगभग 15 प्रतिशत है। यदि 816 सदस्यों (राज्यों के कोटे) वाली नई लोकसभा में भी यही अनुपात बरकरार रहता है, तो उत्तर प्रदेश की सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी। विशेष बात यह है कि इनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

विपक्ष का विरोध और एमके स्टालिन की चेतावनी
सरकार के इस प्रस्ताव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें आम आदमी पार्टी, आरजेडी और डीएमके जैसे दल रणनीति बनाएंगे। विपक्ष की मांग है कि परिसीमन की प्रक्रिया 2011 के बजाय 2021 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए।

दक्षिण भारत के राज्यों ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति में असमान रूप से बढ़ोतरी की गई या तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुँचाया गया, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा। स्टालिन ने एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार बिना किसी राज्य या राजनीतिक दल से सलाह किए एकतरफा और गोपनीय तरीके से आगे बढ़ रही है।

स्टालिन ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को लेकर स्पष्टता की कमी ने दक्षिणी राज्यों के मन में गंभीर आशंकाएं पैदा कर दी हैं। फिलहाल, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक इस नए “लोकसभा मॉडल” पर बहस छिड़ गई है।

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