PM Modi in Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ में ‘शौर्य यात्रा’ में हिस्सा लेकर सबका ध्यान खींचा। यह यात्रा 1026 में महमूद गजनवी के पहले हमले के 1000 साल पूरे होने पर निकाली गई, जो मंदिर के मजबूत विश्वास और हर बार भव्य तरीके से दोबारा बनने की कहानी बयां करती है।
पीएम ने फूलों से सजे खुले वाहन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ सवारी की। उन्होंने शंख बजाकर लोगों का जोश बढ़ाया। यात्रा की अगुवाई गुजरात पुलिस के 108 घोड़ों के दस्ते ने की, जो काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के थे और इन्हें 8 महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। साथ ही, खेड़ा जिले के ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय के लगभग 350 छात्रों ने शंख और डमरू बजाकर माहौल को भक्ति से भर दिया।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में पूजा की और वहां के युवा संस्कृत छात्रों व कलाकारों से बातचीत की। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को याद किया, जिन्होंने आजादी के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। साथ ही, उन बहादुर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने सदियों पहले मंदिर की हिफाजत में अपनी जान दी।
यह ‘शौर्य यात्रा’ ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का हिस्सा है, जो बताती है कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के हौसले और बलिदान का जीता-जागता प्रतीक है, जो हर तबाही के बाद और मजबूत होकर उभरा है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह समय बहुत अच्छा है, यह माहौल बहुत अच्छा है, यह उत्सव बहुत अच्छा है। एक तरफ खुद महादेव हैं, दूसरी तरफ समुद्र की बड़ी लहरें, सूरज की रोशनी, मंत्रों की आवाज, आस्था का जोश और इस पवित्र माहौल में भगवान सोमनाथ के सभी भक्तों की मौजूदगी इस मौके को पवित्र और भव्य बना रही है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा करने का मौका मिला है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस कार्यक्रम में गर्व, सम्मान और महिमा है। इसमें सम्मान का ज्ञान, वैभव की पुरानी धरोहर, अध्यात्म की भावना है। इसमें अनुभव है, खुशी है, अपनापन है और सबसे ज्यादा महादेव का आशीर्वाद है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में सवाल आता है कि ठीक 1000 साल पहले, ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा?… अपनी आस्था, अपने विश्वास और अपने महादेव के लिए हमारे पूर्वजों ने सब कुछ कुर्बान कर दिया। 1000 साल पहले वे आक्रमणकारी सोचते थे कि उन्होंने हमें हरा दिया, लेकिन आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर लहराती ध्वजा पूरी दुनिया को बताती है कि भारत की ताकत क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है… यहां का हर कण बहादुरी और साहस का गवाह है…”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “…सोमनाथ का इतिहास नाश और हार का नहीं है, यह जीत और फिर से बनाने का है। हमारे पूर्वजों की बहादुरी का है, उनके त्याग और बलिदान का है। आक्रमणकारी आते रहे लेकिन हर समय सोमनाथ फिर से बनता रहा, इतनी सदियों का संघर्ष, इतना बड़ा धैर्य, बनाने और फिर से बनाने की यह जिद, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रमणकारी सोमनाथ पर हमला कर रहे थे तो उन्हें लगता था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को हरा रही है, वे धार्मिक कट्टर लोग यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं उसके नाम में ही ‘सोम’ यानी ‘अमृत’ जुड़ा है। उसके ऊपर सदाशिव महादेव के रूप में वह चेतना की शक्ति है जो अच्छाई देने वाली भी है और ताकत का स्रोत भी है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह समय का चक्र है, सोमनाथ को तोड़ने की सोच लेकर आए धार्मिक आक्रमणकारी आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट गए हैं और सोमनाथ मंदिर उसी बड़े समुद्र के किनारे ऊंची ध्वजा थामे खड़ा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अगर किसी देश के पास 100 साल पुरानी धरोहर होती है तो वह देश उसे अपनी पहचान बनाकर दुनिया के सामने रखता है, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पवित्र स्थान हैं… लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की सोच वाले लोगों ने उनसे दूर रहने की कोशिश की, उस इतिहास को भूलाने की कोशिश की।
हम जानते हैं कि सोमनाथ की रक्षा के लिए देश ने कैसे-कैसे बलिदान दिए… कितने ही नायक सोमनाथ मंदिर से जुड़े हैं लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें कभी इतना महत्व नहीं दिया गया बल्कि आक्रमण के इतिहास को भी कुछ राजनेताओं और इतिहासकारों ने छिपाने की कोशिश की…”
गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे धर्म के प्रति ईमानदार कोई भी व्यक्ति ऐसी कट्टर सोच का साथ नहीं देगा लेकिन तुष्टिकरण करने वाले लोगों ने हमेशा इस कट्टर सोच के आगे झुक गए। जब भारत गुलामी से आजाद हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के फिर से बनाने की कसम ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई।
1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी विरोध किया गया… आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं जो सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध करती हैं। आज तलवारों की जगह दूसरे गंदे तरीकों से भारत के खिलाफ साजिश हो रही है इसलिए हमें ज्यादा सतर्क रहना है, खुद को मजबूत बनाना है, एकजुट रहना है…”











