Dhanteras Gold Buying: देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है और धनतेरस तथा दिवाली के अवसर पर लोग सोने और चांदी की खरीदारी को लेकर खासे उत्साहित रहते हैं। हालांकि, इस बार त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में केवल हल्की तेजी देखने को मिल सकती है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि त्योहारी मांग के चलते कीमतों को थोड़ा सहारा जरूर मिलेगा, लेकिन बाजार में बड़ी तेजी आने की संभावना फिलहाल कम है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी और बॉन्ड मार्केट की तरफ निवेशकों का बढ़ता रुझान कीमती धातुओं की तेजी पर मुख्य रूप से ब्रेक लगा रहा है।
बिजनेस टुडे के एक कार्यक्रम में वरिष्ठ एंकर साक्षी बत्रा के साथ चर्चा के दौरान, कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने बाजार के मौजूदा रुख पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस समय सोने-चांदी का बाजार अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में है। धनतेरस और दिवाली के दौरान पारंपरिक खरीदारी बढ़ने से कीमतों में मामूली सुधार दर्ज किया जा सकता है, लेकिन निवेशकों को किसी असाधारण या भारी उछाल की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। बाजार के फंडामेंटल्स इस समय सीमित दायरे में कारोबार का संकेत दे रहे हैं।
दिवाली तक कहां तक पहुंच सकते हैं सोने और चांदी के भाव
अनुज गुप्ता के अनुसार, आगामी दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित बढ़त की ही संभावना बनी हुई है। चर्चा के दौरान जहां सोने का भाव लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था, वहीं दिवाली तक इसके बढ़कर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
इसी प्रकार, चांदी की कीमत उस समय करीब 2.12 लाख रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो बढ़कर 2.20 लाख से 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी अधिक मजबूती नहीं है कि कीमतों में अचानक कोई बड़ा बदलाव देखने को मिले।
बॉन्ड मार्केट की ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं निवेशक
कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ने का एक प्रमुख कारण बॉन्ड मार्केट का मजबूत होना है। अनुज गुप्ता ने बताया कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने के कारण सरकारी बॉन्ड और ट्रेजरी में निवेश करना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन गया है। यही कारण है कि बड़े संस्थागत निवेशक और फंड हाउस सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पूंजी निकालकर अन्य अधिक रिटर्न देने वाले विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं। इस वित्तीय बदलाव का सीधा असर सोने और चांदी की मांग तथा उसकी कीमतों पर पड़ रहा है।
सोने की तुलना में चांदी में क्यों बनी हुई है अधिक कमजोरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के मुकाबले चांदी की स्थिति अधिक कमजोर नजर आ रही है, जिसके पीछे औद्योगिक मांग में आई सुस्ती मुख्य वजह है। चांदी का उपयोग विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन वर्तमान में इसकी औद्योगिक मांग पिछले वर्ष के मुकाबले सुस्त चल रही है। विशेष रूप से चीन में सोलर इंडस्ट्री की तरफ से मांग धीमी पड़ने के कारण चांदी को मिलने वाला आवश्यक समर्थन कमजोर हुआ है, जिससे इसकी कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही है।
त्योहारी खरीदारों के लिए क्या हैं बाजार के संकेत
अगर धनतेरस और दिवाली के पावन पर्व पर आप भी सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे तो आम उपभोक्ताओं के लिए बाजार के संकेत मिले-जुले हैं। अनुज गुप्ता का मानना है कि त्योहारी सीजन की स्थानीय मांग से कीमतों को नीचे से सपोर्ट अवश्य मिलेगा। हालांकि, खरीदारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस बार दिवाली तक कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं होगा। बाजार अपनी तय चाल के अनुसार ही सीमित दायरे में कारोबार करता रहेगा।




















