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LPG Price Hike: ₹29 महंगा होने के बाद भी भारत में गैस सबसे सस्ती, मोदी सरकार का बड़ा दावा

West Asia War Energy Impact: अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में 46 प्रतिशत के भारी उछाल के बावजूद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम सीमित रखने और आपूर्ति सुचारू बनाए रखने पर सरकार ने स्थिति साफ की है।
LPG Cylinder Price Hike LPG Price Hike in 2026:

LPG Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संकट और आपूर्ति बाधाओं के बीच देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने रविवार (7 जून 2026) को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के दामों में 46 फीसदी की भारी बढ़ोतरी होने के बावजूद भारतीय परिवारों को दुनिया में सबसे सस्ती दरों पर रसोई गैस मिल रही है।

बता दें कि यह बयान मोदी सरकार द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी किए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है। इस ताजा मूल्य संशोधन के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई है। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा। उन्हें सालाना पहली चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी मिलती रहेगी, जिससे उनके लिए प्रभावी कीमत ₹642 प्रति सिलेंडर बनी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल सरकार ने सालाना 9 रिफिल पर सब्सिडी देने की घोषणा की थी, जिसे अब घटाकर 4 रिफिल कर दिया गया है। सर्राफा और ऊर्जा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले 7 मार्च को भी प्रति सिलेंडर ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। इस प्रकार अब तक घरेलू सिलेंडर के दामों में कुल ₹89 की संचयी वृद्धि की जा चुकी है। इस संशोधन से पहले स्थिति यह थी कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को बेचे जाने वाले हर घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग ₹703 का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

सरकार द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसके कारण भारत में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़कर ₹1,600 से अधिक हो गई है। भारत की एलपीजी आयात लागत मुख्य रूप से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से जुड़ी होती है, जो इस ईंधन के लिए वैश्विक बेंचमार्क माना जाता है। होर्मुज जलडमरू मध्य में उपजे गतिरोध के कारण खाड़ी क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति काफी प्रभावित हुई है, जिससे फरवरी के बाद से इस बेंचमार्क में करीब 46% की तेजी आई है।

सरकार ने विभिन्न देशों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस वृद्धि के बावजूद, भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तुलना में काफी कम हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी भारत में रसोई गैस के दाम बेहद निचले स्तर पर बने हुए हैं।

इस गंभीर संकट के दौरान भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा जो होर्मुज जलडमरू मध्य के माध्यम से अपनी ऊर्जा शिपमेंट को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में सफल रहे। सरकार ने देश में एलपीजी या अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कमी को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन को बढ़ाया और वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से आपूर्ति का विविधीकरण किया।

आधिकारिक विवरण के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी की बिक्री पर राजस्व नुकसान बढ़कर लगभग ₹60,000 करोड़ तक पहुंच गई, जो इससे पिछले वर्ष ₹41,338 करोड़ थी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹30,000 करोड़ के मुआवजे को मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि कीमतों में किया गया यह ताजा बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता से परिवारों को बचाने और देश भर में ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।

गौर करने वाली बात है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी कीमतों को नियंत्रित कर रही है। अब कोई भी सामान्य परिवार ₹942 की दर पर जितने चाहे उतने सिलेंडर खरीद सकता है। वहीं, 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन वाले उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति वर्ष उनके पहले चार रिफिल पर ₹300 की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण  सहायता मिलती रहेगी, जो एक सामान्य परिवार की औसत वार्षिक खपत के बराबर है। इसके चलते एक गैर-उज्ज्वला परिवार भी बाजार से लिंक वास्तविक लागत की तुलना में लगभग ₹700 कम भुगतान कर रहा है।

वितरण लागतों में अंतर के कारण अलग-अलग स्थानों पर खुदरा कीमतों में मामूली भिन्नता हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय लागत में हुए कई सौ रुपये प्रति सिलेंडर के इस भारी बोझ को उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय सरकार और तेल कंपनियों ने खुद वहन किया है।

होटलों और व्यवसायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर स्वतः बदल जाती हैं, क्योंकि उनका मूल्य सीधे बाजार पर निर्भर करता है। लेकिन घरेलू सिलेंडर के मामले में ऐसा नहीं है। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का 60% हिस्सा आयात करता है और इसकी लैंडेड लागत सऊदी अरामको द्वारा हर महीने की शुरुआत में तय किए जाने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) पर आधारित होती है। यह एक बाहरी कारक है जिस पर भारतीय उपभोक्ताओं का कोई नियंत्रण नहीं है।

पश्चिम एशिया के संकट के दौरान यह बेंचमार्क बहुत तेजी से ऊपर गया। भारत में उपयोग होने वाले 50:50 प्रोपेन-ब्यूटेन मिश्रण के रूप में देखें तो संकट से पहले फरवरी में सऊदी सीपी लगभग $543 प्रति टन था। फरवरी के अंत में होर्मुज जलडमरू मध्य के बंद होने के बाद, अप्रैल का कॉन्ट्रैक्ट प्राइस बढ़कर $775 प्रति टन हो गया (जिसमें प्रोपेन $750 और ब्यूटेन $800 था)। जून में यह और बढ़कर $790 प्रति टन तक पहुंच चुका है। इस प्रकार संकट-पूर्व के स्तर से इसमें 46% की वृद्धि हुई है।

इस अंतर को कमर्शियल सिलेंडर के जरिए आसानी से समझा जा सकता है। दिल्ली में होटलों और रेस्तरां द्वारा उपयोग किया जाने वाला 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर पांच बार की बढ़ोतरी के बाद वर्तमान में ₹3,113.50 (लगभग ₹164 प्रति किलो) पर बिक रहा है। इसके विपरीत, इस मूल्य संशोधन के बाद भी घरेलू उपभोक्ता केवल ₹66 प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं। हालांकि कमर्शियल गैस पर टैक्स की दरें और मार्जिन अधिक होता है, फिर भी घरेलू सिलेंडर की वास्तविक आयात-संबद्ध लागत ₹1,600 से अधिक बैठती है।

सुरक्षा और आपूर्ति के मोर्चे पर सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। होर्मुज जलडमरू मध्य एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए भारत का 54% एलपीजी आयात होता है। संकट के बावजूद वहां से आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। इसके साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाया गया, जिसके तहत उत्पादन प्रतिदिन लगभग 32,000 टन से बढ़ाकर लगभग 52,000 टन किया गया। आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से आयात का विविधीकरण किया गया, जिससे भारतीय बंदरगाहों पर एलपीजी कार्गो की निरंतर आवाजाही सुनिश्चित हुई।

घरेलू स्तर पर आपूर्ति की बचत के लिए उपभोक्ताओं को वहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया गया जहां यह सुविधा उपलब्ध थी। इसके अलावा, सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं और ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया गया है। सरकार के अनुसार, इन रणनीतिक कदमों के कारण ही तीव्र भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद भारतीय घरों में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति को कायम रखा जा सका।

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