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भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी

Published on: 28 August 2022
PM Narender Modi

नई दिल्ली|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में भ्रष्टाचार को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया था। इसे जल्द खत्म करने की अपील भी की गई थी। ऐसे में एक सरकारी रिपोर्ट में पता चला है कि साल 2021 के अंत तक भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल सरकारी कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं सीबीआई से जुड़े कई अधिकारी और कर्मचारियों के ऊपर भी विभागीय कार्यवाही लंबित (पेंडिंग) है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की हाल में सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में बताया गया है, कि साल 2021 के अंत तक 633 सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के 171 मामले अभियोजन की मंजूरी के लिए अलग अलग विभागों में लंबित हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 325 अधिकारियों के 65 मामले वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग से हैं। वहीं 67 कर्मचारियों के 12 मामले केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा रेल मंत्रालय के 30 अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के 19 अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दायरे में हैं।

सीवीसी की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 में उत्तरप्रदेश सरकार के पास 15 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी की मांग को लेकर 8 मामले लंबित हैं। वहीं 8 अधिकारियों से जुड़े 5 मामले जम्मू और कश्मीर में भी लंबित हैं। जबकि दिल्ली सरकार के पास 36 अधिकारियों पर अभियोजन की मंजूरी की मांग को लेकर 4 मामले लंबित थे।

इन सभी सरकारी कर्मचारियों के ज्यादातर मामले देश की सबसे प्रमुख जांच एजेंसी माने जाने वाली सीबीआई देख रही है। ऐसे में जानकर हैरानी होगी कि साल 2021 के अंत तक के आंकड़ों के हिसाब से विभागीय कार्यवाही के 75 मामले खुद सीबीआई के अधिकारी और कर्मचारियों पर चल रहे हैं। इन 75 मामलों में 55 मामले सीबीआई के ग्रुप ए अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही से जुड़े हैं, जबकि 20 मामले ग्रुप बी और सी कर्मचारियों की विभागीय कार्यवाही को लेकर लंबित थे। गौर करने वाली बात है कि साल 2021 के अंत तक सीबीआई के ग्रुप ए के 55 मामलों में 27 मामले पिछले 4 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं ग्रुप बी और सी के 20 मामलों में 9 ऐसे हैं, जो 4 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं।

सीवीसी ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत अभियोजन की मंजूरी देने का अनुरोध मिलने पर सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को तेजी से निर्णय लेने की जरूरत है। इसमें कहा गया है कि संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में यह भी कहा गया है कि सरकार या किसी सक्षम अथॉरिटी को तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना चाहिए।

वहीं सीवीसी की रिपोर्ट में ये भी जानकारी भी दी गई है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई में साल 2021 के अंत तक 1533 पद खाली थे। इसमें बताया गया है कि सीबीआई में कुल स्वीकृत पद 7,273 हैं, लेकिन वास्तविक संख्या 5740 है। यानी 1533 पद अपनी स्वीकृत संख्या से कम हैं। इस रिपोर्ट में जल्द समस्या का समाधान निकालने की बात पर भी जोर दिया गया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग सीबीआई के साथ मासिक समीक्षा बैठकें करता है। इसमें सभी लंबित मामलों को 90 दिनों में निपटारा करने की सलाह दी जाती है। कुछ विशेष मामलों को लेकर अलग से भी बैठकें की जाती हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग हर साल इन मामलों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करता है।
–आईएएनएस

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