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अश्विनी कुमार: हिंदुस्तान में क्राइम सीरीज का चलन, मनोहर कहानियां से भी पहले का है, लेकिन ये कहानियां, गांव-देहात, जाति-धर्म, नक्सल-राजनीति और ज्यादा से ज्यादा ठगी के दायरे से बाहर नहीं निकल पाती।
पहले नेटफ्लिक्स की जामतारा और अब प्राइम वीडियो की फर्जी नई जेनरेशन की हाईटेक टेक्नॉलॉजी और ठगी की ऐसी कहानियां हैं, जो पूरी तरह से सच भले ही ना हों, लेकिन सच से बहुत दूर भी नहीं हैं।
फर्जी ने समझाया नोटों का मकड़जाल क्या है?
प्राइम वीडियो की फर्जी में बहुत सारी नई चीजें हैं। जैसे ये बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर और साउथ सुपरस्टार विजय सेतुपति का ओटीटी डेब्यू हैं। कुछ साल पहले तक कौन सोच सकता था कि ऐसे बड़े स्टार, किसी ओटीटी वेब सीरीज का हिस्सा होंगे, लेकिन दौर बदल रहा है।
नोटों का मकड़जाल
फर्जी एक और नई बात लेकर आती है, वो ये कि फर्जी नोटों के उस मकड़जाल के बारे में इतनी बारीकी और आसानी से समझाती है, जिसका पहला शिकार आम आदमी ही होता है, लेकिन वो इसे समझ नहीं पाता। बस्तियों से दुकानों तक, बैंकों से सरकारों तक फर्जी नोट कैसे सबकी कमर तोड़ती है, वो ये सीरीज किरदारों के बीच से होते हुए समझाती है।
फर्जी की कहानी…
फर्जी कहानी है संदीप, उर्फ सनी की, जो एक शानदार आर्टिस्ट है। सनी, दुनिया के बड़े-बड़े आर्टिस्टों की मशहूर पेटिंग्स की ऐसी शानदार फर्स्ट कॉपी बनाता है, जो असली से भी असली लगे। इन तस्वीरों को बेचने में उसके बचपन का दोस्त फिरोज उसकी मदद करता है। सनी और फिरोज के बचपन की भी एक बैकस्टोरी है। वैसे सनी के नानू, जो खुद एक आर्टिस्ट हैं और क्रांति पत्रिका नाम से एक मैगजीन चलाते हैं।
पैसा बनाने का आइडिया
उनका प्रेस और उनकी पत्रिका दोनो ही कर्जो से दबी हुई है। नानू चाहते हैं कि उनकी पत्रिका, जो खरीदकर कोई नहीं पढ़ता, उसे ऑनलाइन लाया जाए, जिससे पत्रिका से जुड़े उनके उम्रदराज दोस्तों की मदद भी हो सके, लेकिन हालात खराब हैं और कर्ज की रकम, उसका ब्याज… इतना ज्यादा हो चुका है कि क्रांति पत्रिका के बंद होने के हालात हो आ गए हैं। सनी की जिंदगी यहां से ट्विस्ट लेती है, वो कुछ करके पैसा कमाने की जगह, पैसा बनाने का आइडिया लगाता है।
पुलिस ऑफिसर माइकल की एंट्री
अब राइटर सीता मेनन और सुमन कुमार ने नकली नोट बनाने के पूरे प्रोसेज को उसके पकड़े जाने, उसे टेस्ट करने और इंटरनेशनल काउंटरफिटिंग बिल्स बनाने वाले वाले गैंग, फाइनैनिशियल टेरेरिज्म और पॉलिटिक्स का ऐसा ताना बाना बुना है कि आप उसमें खोते चले जाएंगे। इस कहानी में पुलिस ऑफिसर माइकल की एंट्री होती है, जो अपने ही तरीके का ईमानदार है, वो किसी भी हाल में नकली नोट बनाने और इंडिया में उसे फैलाने वाले मंसूर दलाल को पकड़ना चाहता है।
नकली नोटों की पहचान करने वाली चिप
माइकल, सनी के असली लगने वाले नकली नोटों को अपनी ताकत बनाना चाहता है। इस धुरी में सेंटर प्वाइंट बनती है मेघा, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रिसर्च विंग में नकली नोटों की पहचान करने वाली चिप बनाती है। मेघा, रिजर्व बैंक के सिस्टम में बैठने की जगह माइकल की टीम ज्वाइन करती है, जिससे वो इन नोटों को बैकिंग सिस्टम में एंटर होने से पहले रोक सके।
सीजन टू का हिंट
माइकल की अपनी कहानी है, मेघा का अपना ट्रैक है और फिर सनी और मेघा के बीच का प्यार और लुका-छिपी का वो खेल भी है, जो राज-डीके की इस सीरीज को इंडिया का मनी हाइस्ट बना देता है। जिसमें सनी, इस खेल को प्रोफेसर बनकर पूरे सिस्टम को घुमाता रहता है और फिर क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते सीजन टू का हिंट छोड़ देता है।
शानदार परफॉरमेंस और कैरेक्टर्स की सौगात
डायरेक्टर राज और डीके ने मानों अपने वेब सीरीज का यूनिवर्स बनाने की ठान ली है। क्योंकि फैमिली मैन में जादू से आने वाले और बेहद खास इंटेल देकर गायब हो जाने वाले चेल्लम सर का फर्जी में गेस्ट अपीयरेंस हैं। जाहिर है कि राज-डीके ने मिलकर फैमिली मैन और फर्जी यूनीवर्स को सेकेंड सीजन में जोड़ने का हिंट दे दिया है।
फर्जी एक शानदार कहानी है, जो फैमिली मैन वाले ट्रीटमेंट के हिसाब से आगे बढ़ती है। इसमें इमोशन है, क्राइम है, सस्पेंस है, रोमांस है और हालात हैं। इन सबके साथ फर्जी में शानदार परफॉरमेंस और कैरेक्टर्स की सौगात है।
फर्जी को 3.5 स्टार
संदीप, उर्फ़ सनी बने शाहिद, फर्जी में 8 एपिसोड तक बांधकर रखते हैं। विजय सेतुपति का कैरेक्टर तो क्या कहने, हिंदी बोलने में उनकी कमजोरी…. डायरेक्टर राज-डीके ने उनके किरदार की सबसे बड़ी ताकत बना दी है। के.के मेनन के तो क्या कहने। सनी का दोस्त फिरोज के किरदार में भूवन अरोड़ा ने भी कमाल किया है। नानू बने वेटरन एक्टर अमोल पालेकर का तजुर्बा, किरदार से झांकता है। मेघा के किरदार में राशी खन्ना, फर्ज़ी में असली बनकर चमकी हैं। इस एक्ट्रेस में वाकई दम है। बता दें कि फर्जी को 3.5 स्टार है।
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