Solan News: कसौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित “जन समस्या निवारण कार्यक्रम” पूरी तरह से विफल साबित हुआ। महज़ खानापूर्ति के लिए आयोजित इस कार्यक्रम की जानकारी जनता को ही समय पर नहीं दी गई, जिसके चलते कार्यक्रम में चंद कार्यकर्ताओं के अलावा अधिकारी ही नज़र आए। लोगों की समस्याओं का समाधान करने पहुंचे विधायक विनोद सुल्तानपुरी भी सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए पहुंचे और महज एक घंटे में कार्यक्रम से रवाना हो गए।
जनता बेखबर, कुर्सियां रही खाली
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन विडंबना यह रही कि अधिकतर लोगों को इस आयोजन की कोई भी जानकारी नहीं मिली। न तो इसका समुचित प्रचार किया गया और न ही प्रशासन ने जनता तक सूचना पहुंचाने की कोई ठोस व्यवस्था की। स्थानीय लोग और कांग्रेस पार्टी के अपने कार्यकर्ता इस बात को लेकर खासे नाराज़ दिखे, कि सरकार जनता के लिए कार्यक्रम तो आयोजित कर रही है, लेकिन इसकी सफलता सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
अधिसूचना जारी, लेकिन जनता और मीडिया रही अनजान
कार्यक्रम की जानकारी के लिए एक अधिसूचना तो जारी कर दी गई थी, लेकिन इसे जनता तक पहुंचाने की कोई प्रभावी व्यवस्था ही नहीं की गई। यहां तक कि मीडिया को भी इस कार्यक्रम की सूचना नहीं मिली, जिससे यह आयोजन पूरी तरह से असफल हो गया। लोगों का कहना है कि अगर सूचना सही समय पर दी जाती, तो अधिक लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए यहां आ सकते थे।
समस्याओं के समाधान के बजाय खानापूर्ति
कार्यक्रम में विधायक ने जनता की समस्याओं को सुनने के लिए मात्र एक घंटे का समय दिया। इस दौरान जिन समस्याओं पर चर्चा हुई, वे भी कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं तक ही सीमित रहीं जो हमेशा ही विधायक के साथ घूमने वाले कुछ पिछलग्गू है।
कार्यक्रम स्थल का गलत चयन, नाराज़गी बढ़ी
समस्या निवारण कार्यक्रम स्थल को लेकर भी लोगों में नाराजगी दिखी। चर्चा रही कि मेला आयोजन स्थल पर इस मीटिंग का आयोजन किया गया, जिससे 500 मीटर आसपास के लोगों की भी ऐसा लगा कि मेले को लेकर यह बैठक होगी, जिसके चलते वे लोग भी से इसमें शामिल हो सके और न ही कोई ठोस संवाद स्थापित हो सका।
नेता सिर्फ औपचारिकता निभाने पहुंचे?
कार्यक्रम में विधायक विनोद सुल्तानपुरी महज एक घंटे ही बैठे, और उसके बाद अन्य कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक सिर्फ चाय पीने के लिए आए और उसके बाद चलते बने। अगर सरकार वास्तव में जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए गंभीर होती, तो कार्यक्रम का बेहतर प्रचार-प्रसार किया जाता और जनता को अधिकाधिक संख्या में इसमें जोड़ा जाता।
जनता का विश्वास डगमगाया
इस असफल आयोजन ने जनता में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास को हिला कर रख दिया है। जनता को उम्मीद होती है कि जनमंच की तरह इस तरह के कार्यक्रम में उनकी समस्याओं को प्रमुखता से सुना जाएगा और उनका समाधान किया जाएगा, लेकिन नतीजा इसके ठीक विपरीत रहा। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया, जिससे एक बार फिर सरकार की उदासीनता और प्रशासन की लापरवाही उजागर हो गई कि वह जनता के प्रति कितना चिंतित है
विधायक का हास्यास्पद बयान
कार्यक्रम की विफलता पर जब विधायक से सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद हास्यास्पद जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “यह तो सिर्फ एक शुरुआत है, क्योंकि धर्मपुर में मेला है, इसलिए प्रशासन का ध्यान मेले को सफल बनाने पर है।” वहीं, जब उनसे पूछा गया कि जनता को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं मिली, तो उन्होंने इसे टालते हुए कहा कि गोलमोल जबाब दे दिया। इस बयान ने प्रशासन की नाकामी को और उजागर कर दिया, क्योंकि जब आम जनता को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं थी, तो उसमें भाग लेने की उम्मीद कैसे की जा सकती थी?



















