Baghat Bank NPA Update: बघाट बैंक प्रबंधन की ओर से लोन न चुकाने वाले डिफाल्टरों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में बैंक अब डिफाल्टरों की संपत्तियों को ऑक्शन कर अपनी डूबी हुई रकम की वसूली करने में जुट गया है। सहायक पंजीयक की अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद बैंक ने कई बड़े डिफाल्टरों की संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक बैंक प्रबंधन आगामी 12 जून को कुल 24 बड़े डिफाल्टरों की संपत्तियों की नीलामी करने जा रहा है। इस नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने और इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इच्छुक खरीदार 11 जून तक अपने आवेदन बैंक के पास जमा कर सकेंगे। इसके ठीक अगले दिन यानी 12 जून को ऑनलाइन माध्यम से संपत्तियों की नीलामी की जाएगी।
बैंक प्रबंधन के मुताबिक, जिन डिफाल्टरों की संपत्तियां इस बार नीलामी की सूची में लगाई गई हैं, उनमें ज्यादातर बड़े कर्जदार शामिल हैं। इन लोगों ने बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लिया था और लंबे समय से भुगतान नहीं किया है। खास बात यह है कि इस कार्रवाई में कई बड़े व्यावसायिक और रिहायशी भवन भी शामिल हैं, जिन्हें बैंक ने पहले ही अपने कब्जे में ले लिया था और अब उन्हें बेचकर रिकवरी की जाएगी।
12 जून को होने वाली इस नीलामी में सबसे बड़ी लेनदारी देहूंघाट के एक डिफाल्टर से जुड़ी हुई है। इस डिफाल्टर की तीन संपत्तियों को करीब 1.65 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस के साथ नीलामी के लिए बाजार में उतारा गया है। इस कर्जदार ने बैंक से लोन लिया था, लेकिन बाद में मासिक किस्तें नहीं भरीं, जिसके चलते अब कुल देनदारी करीब 1.65 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
इसके अलावा, बद्दी के एक बड़े कारोबारी की 3.56 करोड़ रुपये की संपत्ति भी इस नीलामी का हिस्सा है, जिसमें एक भव्य भवन और एक बीघा से अधिक की जमीन शामिल है। कुल मिलाकर इस बार 8 से 10 करोड़ रुपये की संपत्तियां दांव पर लगी हैं। यदि इनमें से 50 फीसदी संपत्तियां भी बिक जाती हैं, तो बैंक को अपना एनपीए कम करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
वर्तमान में बघाट बैंक का एनपीए करीब 102 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि जब अक्तूबर 2025 में इस बैंक पर वित्तीय कैपिंग लगाई गई थी, तब इसका कुल एनपीए 138 करोड़ रुपये था। उसके बाद से बैंक द्वारा की जा रही लगातार लोन रिकवरी के कारण इस आंकड़े में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
हालांकि, आरबीआई के नियमों के तहत बैंक को इस एनपीए को अभी और ज्यादा कम करना होगा, क्योंकि उसके बाद ही बैंक के ऊपर लगी वित्तीय कैपिंग को पूरी तरह से हटाया जा सकेगा। यही वजह है कि अब डिफाल्टरों की अचल संपत्तियों को नीलामी पर लगाकर बैंक प्रबंधन इस वित्तीय बोझ को कम करने का आक्रामक प्रयास कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि बघाट बैंक में कैपिंग लगे हुए अब आठ महीने का लंबा समय बीत चुका है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पहले मार्च तक के लिए कैपिंग लगाई गई थी, जिसे बाद में तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। अब आगामी जुलाई महीने में बैंक के ऊपर लगी इस कैपिंग को हटाने या बरकरार रखने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बता दें कि पिछले नौ महीनों से आम खाताधारकों और स्थानीय लोगों को अपनी ही जमा पूंजी निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरी अवधि के दौरान लोग केवल एक बार में अधिकतम 10 हजार रुपये ही निकाल पाए हैं, जिसके चलते जनता अब जल्द से जल्द इस कैपिंग के हटने का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
इस पूरे मामले पर आधिकारिक जानकारी देते हुए बघाट बैंक सोलन के प्रबंध निदेशक राजकुमार कश्यप ने बताया कि 12 जून को 24 बड़े डिफाल्टरों की संपत्तियां नीलाम की जाएंगी। यदि ये संपत्तियां समय पर बिक जाती हैं, तो इससे बैंक की वित्तीय स्थिति को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नीलामी सूची में सोलन शहर के कुछ प्रमुख भवनों के अलावा कीमती जमीनें भी शामिल हैं। इसके साथ ही बद्दी का भी एक बड़ा डिफाल्टर इस कार्रवाई की जद में आया है, जिसकी करीब 3.56 करोड़ रुपये की कीमत वाले भवन और जमीन को ऑक्शन पर लगाया गया है।

















