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Himachal Patta Land: पट्टेदार किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के सालों से अटके इंतकाल को तुरंत करने के सख्त निर्देश’

Jagat Singh Negi Revenue Minister: शिमला में किसानों और बागवानों की समस्याएं सुनने के बाद राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को पट्टे की जमीनों के इंतकाल की समयबद्ध प्रक्रिया पूरी करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
Published on: 25 July 2026
Himachal Patta Land: पट्टेदार किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के सालों से अटके इंतकाल को तुरंत करने के सख्त निर्देश'

Himachal Patta Land Mutation Rules: हिमाचल प्रदेश में दशकों पहले पट्टे पर दी गई जमीनों का मालिकाना हक पाने की उम्मीद में बैठे हजारों किसानों और बागवानों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजस्व विभाग की प्रशासनिक लेटलतीफी और फाइलों को सालों तक अटका कर रखने की पुरानी व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

सचिवालय में जनसुनवाई के दौरान राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि पट्टे की जमीन से जुड़े सभी पात्र मामलों का इंतकाल (म्यूटेशन) निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर काम में देरी की या प्रक्रिया में टालमटोल की, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश के कई परिवार पिछले 50 से अधिक वर्षों से पट्टे पर मिली जमीन पर खेती और बागवानी कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें इसका कानूनी मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। सचिवालय में भुट्टी, थानाधार, कोटगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान और बागवान अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे।

पीड़ितों की बात सुनने के बाद राजस्व मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने उप तहसील कोटगढ़ के तहसीलदारों को स्पष्ट आदेश दिए कि आगामी कुछ दिनों में पात्र मामलों के इंतकाल का कार्य पूरा किया जाए, ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के बेवजह चक्कर न काटने पड़ें।

राजस्व मंत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह से स्पष्ट है कि सालों पहले पट्टे पर दी गई जमीन पर वास्तविक रूप से काबिज लोगों को जल्द से जल्द वैधानिक मालिकाना हक प्रदान किया जाए। जनसुनवाई में किसानों और बागवानों ने आरोप लगाया कि सभी आवश्यक कागजात और दस्तावेज पूरे होने के बावजूद उनके इंतकाल के मामले सालों से फाइल में लंबित पड़े हैं।

इस पर ध्यान देते हुए मंत्री ने यह भी आदेश दिया कि कोटगढ़ क्षेत्र के निवासियों को पट्टे से जुड़े रिकॉर्ड और मुसब्बी जैसे जरूरी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए रामपुर न जाना पड़े। इसके लिए संबंधित स्थानीय राजस्व कार्यालयों में ही पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे लोगों के समय और धन की बचत हो सके।

जनसुनवाई के दौरान मैलन गांव के निवासी रतन चंद ने मंत्री के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए बताया कि उनके पिता को वर्ष 1974 में 3 बीघा 18 बिस्वा जमीन पट्टे पर आवंटित की गई थी। इसके बावजूद आज तक उन्हें इस भूमि का कानूनी मालिकाना हक प्राप्त नहीं हो सका है। मंत्री के दखल के बाद अब सोमवार को उनकी जमीन का इंतकाल कर मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

रतन चंद ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि उनकी भूमि से सड़क निर्माण के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा शपथ पत्र देने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पास जीवन यापन के लिए यही एकमात्र जमीन है और सड़क बनने से करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन प्रभावित हो जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी किसान पर जबरन शपथ पत्र देने का दबाव न बनाया जाए।

उधर, सरकारी अधिकारियों के वक्तव्य अनुसार, दशकों पहले पट्टे पर दी गई जमीनों के मामलों में दस्तावेजों की विधिवत जांच-पड़ताल कर पात्र किसानों और बागवानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। बता दें कि सुक्खू सरकार का मुख्य उद्देश्य सालों से जमीन पर काबिज वास्तविक लाभार्थियों को उनका विधिक अधिकार दिलाकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों का स्थायी समाधान निकालना है। राज्य सरकार के इन सख्त और पारदर्शी निर्देशों के बाद यह उम्मीद जगी है कि फाइलों में दबे हजारों इंतकाल के मामले जल्द निपटाए जाएंगे।

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