Dharamshala Land Scam Case: धर्मशाला में सरकारी जमीन की कथित गड़बड़ी से जुड़ा मामला अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह पैसों के बड़े लेनदेन तक पहुंच गया है। विजिलेंस की शुरुआती जांच में प्रॉपर्टी डीलर नेकराम और उनके परिवार की बताई गई आय, बैंक खातों के बैलेंस और जमीन खरीदने के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया है। जिससे प्रॉपर्टी डीलर नेकराम और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस जांच में मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि जब बैंक खाते में कभी सिर्फ 17 रुपये थे और आयकर रिटर्न में सालाना आय बेहद कम दिखाई गई, तो लाखों-करोड़ों रुपये की जमीन खरीदने के लिए धन कहां से आया। विजिलेंस की एफआईआर के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नेकराम ने अपने आयकर रिटर्न में कुल 12 लाख 03 हजार 790 रुपये की आय दर्शाई थी।
इसी समयावधि के दौरान नेकराम, उनकी पत्नी किरण बाला और मां मंगला देवी के नाम पर लगभग 48.44 लाख रुपये की जमीन खरीदी गई। विजिलेंस की शुरुआती जांच से यह स्पष्ट होता है कि परिवार की घोषित आर्थिक स्थिति इस प्रकार की भारी जमीन खरीद के अनुकूल नहीं थी। जांच अधिकारियों ने नेकराम के विभिन्न बैंक खातों के पुराने रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच की है।
मीडिया में आई एक खबर के मुताबिक, 1 जनवरी 2013 को उनके एक बैंक खाते में मात्र 17 रुपये शेष थे। इसके अलावा, दूसरे खाते में 18 फरवरी 2025 को 2 लाख 61 हजार 725 रुपये होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, उनकी मां मंगला देवी के खाते में 1 जनवरी 2020 को 5 हजार रुपये और 9 सितंबर 2024 को 1 लाख 14 हजार 622 रुपये होने की बात उजागर हुई है।
इन बेहद सीमित बैंक बैलेंस के बावजूद परिवार द्वारा जमीन खरीदने का सिलसिला लगातार जारी रहा। विजिलेंस रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में नेकराम ने 48.50 लाख रुपये की जमीन खरीदी और 22.50 लाख रुपये की जमीन बेची थी। इसके बाद साल 2013 में भी 23.95 लाख रुपये की संपत्ति खरीदने और 11.80 लाख रुपये की संपत्ति बेचने के तथ्य सामने आए हैं, जिससे वित्तीय लेन-देन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
जांच के दौरान आयकर रिटर्न और जमीन के पुराने सौदों का जब मिलान किया गया, तो बड़ा अंतर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, नेकराम का वित्त वर्ष 2011-12 में टर्नओवर 2 लाख 07 हजार 955 रुपये, 2012-13 में 2 लाख 68 हजार 808 रुपये और 2013-14 में 3 लाख 92 हजार 881 रुपये दर्ज किया गया था। इतनी कम आय के बीच भारी रकम के इंतजाम को लेकर विजिलेंस ने आशंका जताई है कि इन सौदों में किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों की काली कमाई का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
विजिलेंस की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नेकराम, उसकी पत्नी और मां के नाम पर खनियारा, योल-2, मंदल, अंद्रार, जद्रांगल, सिद्धवाड़ी, धर्मशाला, शीला और पालमपुर समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में संपत्तियां खरीदी गईं। वर्ष 2011 से 2025 के बीच किए गए इन सभी खरीद-बिक्री के मामलों की वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है, जिसकी वित्तीय ट्रेल अब अधिकारियों द्वारा खंगाली जा रही है।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रकरण की मूल शुरुआत रक्कड़-सिधवारी क्षेत्र की सरकारी जमीन की म्यूटेशन से जुड़ी एक शिकायत के माध्यम से हुई थी। एफआईआर में मुख्य आरोप है कि वर्ष 2019 में नेकराम ने संबंधित लोगों को सरकारी जमीन की म्यूटेशन उनके नाम कराने का भरोसा दिया था और इसके एवज में प्रति व्यक्ति 15 लाख रुपये लेने की बात सामने आई थी। इसके बाद स्थानीय राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से म्यूटेशन और रजिस्ट्रियों को अंजाम दिया गया।
बता दें कि इस बहुचर्चित मामले में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें तत्कालीन तहसीलदार अमर सिंह, कानूनगो वीरेंद्र कुमार, पटवारी मनीष कुमार के साथ-साथ मुख्य आरोपी नेकराम, उनकी पत्नी किरण बाला, मां मंगला देवी, सचिन कुमार और रविंदर कुमार शामिल हैं। वर्तमान में इस संपूर्ण संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर बिंदु कुमारी को सौंपी गई है, जो सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
दूसरी ओर, इस पूरी जांच के केंद्र में आए प्रॉपर्टी डीलर नेकराम ने अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि वे वर्ष 2007 से इस कारोबार से जुड़े हैं और उन्होंने अपने सभी सौदे राजस्व विभाग के नियमों के दायरे में रहकर ही किए हैं। साथ ही, उन्होंने इस जांच को राजनीतिक प्रताड़ना करार देते हुए एजेंसियों पर मानसिक रूप से परेशान करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।


















