Himachal News Today: केद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के लिए रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक दल भले ही राज्यपाल से मिलने जा रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां हिमाचल प्रदेश के वास्तविक हितों की बात करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि भाजपा विधायकों को राज्य के रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के नुकसान के बारे में जानकारी देनी चाहिए। बता दें कि केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के कारण हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, जिससे प्रति वर्ष ₹10,000 करोड़ का नुकसान होगा।
सीएम सुक्खू ने स्पष्ट किया कि विधायक क्षेत्र विकास निधि तब ही जारी की जाएगी जब राज्य की आर्थिक स्थिति ठीक होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता दिल्ली में जाकर हिमाचल प्रदेश सरकार की मदद रोक रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने की वजह से हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और यह आजादी के बाद पहली बार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे उनके साथ दिल्ली चलकर हिमाचल प्रदेश के हितों की पैरवी करें। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र में सरकार जनता को यह बताएगी कि बीते दस वर्षों में केंद्र सरकार ने राज्य को क्या दिया है। उन्होंने भाजपा विधायकों से सहयोग मांगा और कहा कि अब वित्त मंत्री से मिलने की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर अपना पक्ष रखना जरूरी है।
सुक्खू ने भाजपा विधायकों पर आरोप लगाया कि वे तथ्यों पर चर्चा करने के बजाय दुष्प्रचार में लगे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक क्षेत्र विकास निधि केवल भाजपा के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस विधायकों के लिए भी नहीं जारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा है और 1 फरवरी का दिन हिमाचल प्रदेश के लिए काला दिन था। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब भाजपा नेताओं को साथ चलकर प्रधानमंत्री के सामने हिमाचल प्रदेश के हितों की बात रखनी चाहिए।
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के बीच सचिवालय में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक के आधार पर यह आशा जताई जा रही है कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने से उत्पन्न हुई चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थिति पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक विशेष सत्र आयोजित किया जा सकता है।
विशेष सत्र बुलाने का मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि विशेष श्रेणी वाले एवं केंद्र पर आश्रित राज्य हिमाचल प्रदेश के सामने एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, जिस पर तत्काल विधायी चर्चा आवश्यक है। इस सत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों को राज्य के हित में चर्चा करनी होगी। सत्र में पारित किया जाने वाला संकल्प केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाएगा।
जयराम ठाकुर लगातार साध रहे सुक्खू सरकार पर निशाना
इस बीच, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर लगातार सुक्खू सरकार को निशाना बना रहे हैं। राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर उन्होंने पूछा कि जब मुख्यमंत्री ने कहा था कि 2032 तक हिमाचल देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल होगा, तो उसका ठोस दृष्टिकोण क्या है। जयराम ठाकुर ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत, 17 राज्यों को प्रारंभ में अधिक धनराशि मिली थी जो अब घटा दी गई है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भविष्य में यह अनुदान जारी रहेगी या नहीं, यह तय नहीं था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अन्य राज्यों को यह अनुदान दिए जाने का विरोध किया था, और हिमाचल की कांग्रेस को इस पर कर्नाटक सरकार से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अनुदान में हिमाचल प्रदेश को सभी राज्यों में सर्वाधिक राशि प्राप्त हुई थी। जयराम ने सरकार से पूछा कि उसने वित्त आयोग के समक्ष अपना मामला प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रखा? उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे केंद्र सरकार के समक्ष एक मजबूत प्रस्तुति देकर धनराशि सुनिश्चित कराएं और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के अपने दावों व योजना को स्पष्ट रूप से पूरे प्रदेश के सामने रखें, क्योंकि पूरा हिमाचल यही जानना चाहता है।















