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Himachal News: सांसदों, विधायकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने संबंधी हिमाचल सरकार की याचिका पर विचार करने के लिए सुप्रीमकोर्ट सहमत

Latest Himachal Pradesh News: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ दर्ज 45 आपराधिक मामलों को वापस लेने की अनुमति मांगी गई है। ये मामले मुख्य रूप से कोविड महामारी के दौरान रैलियां करने से जुड़े
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Himachal News: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें कोविड महामारी के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पिछली सरकार द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।

बता दें कि यह याचिका राज्य के मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ 45 आपराधिक मामलों को वापस लेने की अनुमति देने के लिए दायर की गई थी। इनमें से कई मामले कोविड के दौरान रैलियां करने से संबंधित हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च, 2024 को तय की है।

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गौरतलब है कि इससे पहले, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल, 2024 को राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुनाया था, जिसमें केवल 15 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी थी, जबकि 45 मामलों को वापस लेने की याचिका खारिज कर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि 65 मामलों में से 5 मामलों का निपटारा पहले ही हो चुका है, और उनमें से एक मामला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ था।

राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। शुक्रवार को वरिष्ठ वकील वी गिरी ने उच्चतम न्यायालय से अपील की कि इन मामलों को जनहित में वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षकों, लोक अभियोजकों और जिला वकीलों से स्वतंत्र राय लेने के बाद लिया गया था।

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इस मामले में उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कुछ महत्वपूर्ण धाराओं के तहत दर्ज मामलों को वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिनमें जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण फैलने की संभावना वाले लापरवाही भरे कार्य, लोक सेवक पर हमला और शांति भंग करने के इरादे से अपमान जैसी धाराएं शामिल हैं। अब, उच्चतम न्यायालय के फैसले का सभी को इंतजार है, जो 16 मार्च को होगा।

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