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Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, हिमाचल बनेगा ‘आत्मनिर्भर’? जानें बड़ी घोषणाएं

Himachal Pradesh Budget 2026-27: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज विधानसभा में राज्य का बजट पेश करेंगे। राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने और वित्तीय चुनौतियों के बीच इस बजट में किन नई योजनाओं का ऐलान होगा? बजट भाषण की लाइव अपडेट्स और मुख्य बातें यहाँ पढ़ें।
Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, क्या हिमाचल बनेगा 'आत्मनिर्भर'? जानें बड़ी घोषणाएं
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Himachal Budget 2026 Live: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज अपनी सरकार का चौथा बजट पेश करने जा रहे हैं। विधानसभा में सुबह 11:00 बजे बजट भाषण शुरू होगा। इस बार के बजट (2026-27) पर केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने का साफ असर देखने को मिल सकता है, जिसके संकेत मुख्यमंत्री पहले ही दे चुके हैं।

माना जा रहा है कि इस साल बजट के आंकड़ों में पिछले साल के मुकाबले कोई बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी।बजट को आखिरी रूप देने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू शुक्रवार दोपहर शिमला के ‘ओक ओवर’ पहुंचे थे। वहां उन्होंने मुख्य सचिव संजय गुप्ता और वित्त सचिव देवेश कुमार सहित अन्य बड़े अधिकारियों के साथ बैठकर बजट के हर जरूरी बिंदु पर बारीकी से चर्चा की। बता दें कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने वीरवार को वर्ष 2025-26 के लिए 40,461.95 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित किया गया है।

नोट:- यह पोस्ट एक लाइव ब्लॉग है जिसे बार-बार रिफ्रेस करते रहें ,आपको बजट से जुडी सारी लेटेस्ट जानकारी मिलती रहेगी । 

हिमाचल प्रदेश प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच ऐसे मुश्किल समय में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना लगातार चौथा बजट पेश करने जा रहे हैं। इस बजट को केवल सरकारी आंकड़ों के तौर पर नहीं, बल्कि हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने और साल 2032 तक देश का सबसे खुशहाल राज्य बनाने की एक बड़ी योजना के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य की वित्तीय स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। हर महीने कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए करीब 2800 करोड़ रुपये की बड़ी रकम चाहिए होती है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह विकास की गति को भी बनाए रखे और साथ ही अपने खर्चों और अनुशासन में सही तालमेल बिठाए ताकि राज्य को आर्थिक मजबूती मिल सके।

-हिमाचल प्रदेश के पास संसाधन भले ही कम हों, लेकिन इस साल राज्य की आर्थिक हालत काफी मजबूत दिख रही है। शुक्रवार को विधानसभा में पेश हुए नए आर्थिक सर्वे (2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि विकास की रफ्तार और लोगों की कमाई, दोनों ही मामलों में हिमाचल ने देश के औसत को पीछे छोड़ दिया है।

-मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल राज्य की विकास दर 8.3% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे देश की औसत दर 7.6% के आसपास है। आमदनी की बात करें तो हिमाचल में एक व्यक्ति की सालाना औसत आय (Per Capita Income) अब बढ़कर 2,83,626 रुपये तक पहुंच सकती है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 9.8% ज्यादा है और देश की औसत आय से करीब 64,000 रुपये अधिक है। पिछले साल यह आंकड़ा 2,58,196 रुपये था।

-मुख्यमंत्री सुक्खू के आने वाले बजट पर प्रदेश के हर वर्ग की नजर टिकी है। चाहे सरकारी कर्मचारी हों, पेंशनर, किसान-बागवान हों या फिर व्यापारी और उद्योगपति, सभी को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। हिमाचल प्रदेश इस समय करीब एक लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के नीचे दबा है और सरकार को कर्मचारियों व पेंशनरों की पुरानी देनदारियों का भुगतान भी करना है। ऐसे में मुख्यमंत्री बतौर वित्त मंत्री इस आर्थिक स्थिति को कैसे संभालते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

-बजट 2026-27 की अगली प्रक्रिया के तहत सोमवार से इस पर सामान्य चर्चा शुरू की जाएगी, जो 25 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 27 मार्च से बजट की मांगों पर वोटिंग और विस्तृत चर्चा होगी। आखिर में, 30 मार्च को इस बजट को आधिकारिक तौर पर पास कर दिया जाएगा।

Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, क्या हिमाचल बनेगा 'आत्मनिर्भर'? जानें बड़ी घोषणाएं
Himachal Pradesh Budget 2026 Highlights

-हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को काफी हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में एंट्री टैक्स बढ़ाए जाने का कड़ा विरोध किया। विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए भाजपा सदस्यों ने मांग की कि सरकार बढ़ाए गए टैक्स को तुरंत वापस ले।

-इसी बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक भूरे रंग के ब्रीफकेस में बजट के दस्तावेज लेकर सदन पहुंचे। उन्होंने जैसे ही बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, राज्य की आर्थिक स्थिति और 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रांट बंद किए जाने का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आर्थिक संकट के समय विपक्ष ने सरकार का साथ नहीं दिया। उनकी इस टिप्पणी से भाजपा विधायक नाराज हो गए और नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच (वेल) पहुंच गए। शोर-शराबे की वजह से मुख्यमंत्री को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा।

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-विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को शांत कराने की कोशिश की और सदन को कुछ देर के लिए स्थगित भी करना पड़ा, हालांकि बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। मुख्यमंत्री ने बजट तैयार करने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इसे आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस दौरान उन्होंने खाड़ी देशों के युद्ध पर भी चिंता जाहिर की। हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने हस्तक्षेप किया और आश्वस्त किया कि जिन शब्दों से विपक्ष को आपत्ति थी, उन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। फिलहाल, विपक्ष के शोर-शराबे के बीच बजट पेश करने की प्रक्रिया जारी है।

– विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सीएम की ओर से कहे गए जिन शब्दों से नेता प्रतिपक्ष, विपक्ष आहत हैं उसे सदन की कार्यवाही व बजट भाषण से हटा दिया जाएगा।

-मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ किया कि हिमाचल की स्थिति उत्तराखंड या असम जैसी नहीं है, क्योंकि हिमाचल अभी अपनी कमाई से खर्च चलाने वाला राज्य नहीं बन पाया है। उन्होंने चिंता जताई कि केंद्र सरकार से हिमाचल को वैसी मदद नहीं मिल रही है जैसी मिलनी चाहिए। सुक्खू ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें केंद्र से आरडीजी और जीएसटी मुआवजे के रूप में करोड़ों रुपये मिले थे, लेकिन उन्होंने इस पैसे का सही इस्तेमाल नहीं किया।

-सीएम ने कहा कि पूर्व सरकार को आरडीजी के रूप में 47,000 व जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 13,000 करोड़ मिले। पूर्व सरकार ने यदि लोन का 50 फीसदी भी चुकाया होता तो आज डेट ट्रैप की स्थिति न होती। अब व्यर्थ के संस्थानों को बंद करना होगा। फिजूलखर्ची रोकनी होगी

-मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ कर दिया है कि सरकार अपने फैसलों पर अडिग रहेगी और पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि साल 2025-26 के लिए बजट का कुल हिस्सा 54,928 करोड़ रुपये तय किया गया है। अगर पिछले साल से तुलना करें, तो इस बार बजट में करीब 3,586 करोड़ रुपये की कमी आई है, क्योंकि पिछला बजट 58,514 करोड़ रुपये का था।

-सीएम ने भरोसा दिलाया कि जनता से किए गए सभी वादों और गारंटियों को सरकार हर हाल में और पूरी तरह से निभाएगी। अपनी बात को मजबूती देने के लिए उन्होंने कविता की कुछ पंक्तियाँ भी सुनाईं, जिनका संदेश था कि जो लोग सही और गलत के बीच चुपचाप किनारे बैठे रहते हैं, वक्त उन्हें भी दोषी मानता है।

-सीएम ने कहा कि सेब पर आयात शुल्क (Import Duty) और नई ट्रेड डील हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर देगी। यह हमारे किसानों और बागवानों के साथ सरासर नाइंसाफी है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आरडीजी (RDG) रुकने और कई आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, सरकार अपनी सभी गारंटियों को हर हाल में पूरा करेगी। इसके साथ ही, पिछले काफी समय से अधूरे पड़े 300 विकास कार्यों को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार की प्राथमिकता इन रुकी हुई योजनाओं को जल्द से जल्द मुकाम तक पहुँचाना है।

-मुख्यमंत्री सुक्खू ने पशुपालकों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए गाय के दूध की खरीद कीमत को 51 रुपये से बढ़ाकर अब 61 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह, भैंस के दूध के दाम में भी बढ़ोतरी की गई है, जो अब 61 रुपये के बजाय 71 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस कदम का सबसे ज्यादा लाभ गांव में रहने वाली हमारी उन महिलाओं को मिलेगा जो डेयरी के काम से जुड़ी हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

-हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में भेड़पालन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है, जिसके तहत 300 करोड़ रुपये की योजना शुरू की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को आर्थिक मजबूती देना है। इसके तहत अब ऊन की खरीद पर किसानों को 100 रुपये प्रति किलोग्राम का ‘प्राइस सपोर्ट’ (मूल्य समर्थन) दिया जाएगा, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का सही दाम मिल सके। इसके साथ ही, ऊन की सही तरीके से खरीद, उसकी ग्रेडिंग और क्वालिटी की जांच के लिए आधुनिक तकनीक और लैब विश्लेषण पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने इस तकनीकी ढांचे को तैयार करने और ऊन के बेहतर प्रबंधन के लिए 2 करोड़ रुपये के अलग बजट का प्रावधान किया है।

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-सुक्खू सरकार ने इस बजट में किसानों के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में अच्छी बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब गेहूं को ₹60 से बढ़ा कर ₹80, मक्की पर ₹40से बढ़ा कर ₹50 और पांगी का जौ ₹60 से बढ़ा कर ₹80 प्रति किलो के भाव पर किया गया है। हल्दी के दामों में भी बढ़ोतरी कि गई है जिसे ₹90 से बढ़ा कर ₹150 प्रति किलो किया है। खास बात यह है कि राज्य में पहली बार अदरक के लिए ₹30 का MSP तय किया गया है। साथ ही, खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘राज्य किसान आयोग’ बनाने और पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए विशेष ‘बीज गांव’ स्थापित करने की घोषणा की गई है, जहाँ किसानों को सब्सिडी की सुविधा भी मिलेगी।

-सरकार ने मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना शुरू करने का फैसला लिया है। अब जलाशय से पकड़ी गई मछली के लिए कम से कम 100 रुपये का समर्थन मूल्य (MSP) दिया जाएगा, ताकि मछुआरों को सही दाम मिल सके। इसके अलावा, मछुआरों को नई नाव खरीदने के लिए 70% की सरकारी मदद (अनुदान) भी मिलेगी।

Himachal Budget 2026 Live: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट, क्या हिमाचल बनेगा 'आत्मनिर्भर'? जानें बड़ी घोषणाएं

-हिमाचल प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। साल 2030 तक राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाकर 32% करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत 2026-27 के दौरान 4,000 हेक्टेयर भूमि पर नए पौधे लगाए जाएंगे। पर्यटन और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 50 नई ईकोटूरिज्म साइट्स विकसित की जा रही हैं और अब 50 विश्राम गृहों (रेस्ट हाउस) की बुकिंग भी ऑनलाइन की जा सकेगी।

-धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाने के लिए सरकार श्री ज्वालाजी और श्री नैना देवी जी जैसे पवित्र स्थलों का विकास करेगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए होटल पीटरहॉफ और होटल हमीर का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। अब पर्यटन पंजीकरण के लिए पीपीपी मॉडल आधारित सिस्टम शुरू होगा और एडवेंचर के शौकीनों के लिए खास माउंटेन बाइकिंग रूट भी तैयार किए जाएंगे।

-कांगड़ा एयरपोर्ट के पास एक आधुनिक एरोसिटी बनाने की योजना है। इसके साथ ही अगले महीने से दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला के बीच नियमित उड़ानें शुरू हो जाएंगी। आने वाले समय में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट की सुविधा से जोड़ दिया जाएगा ताकि सफर और भी आसान हो सके

-मुख्यमंत्री ने बताया कि अब पर्यटन स्थलों पर रात में पिकनिक मनाने की सुविधा मिलेगी। साथ ही, फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए नियमों को आसान बनाया जाएगा। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य प्रमुख टूरिस्ट जगहों पर रात के समय भी रौनक बढ़ाना है।

-मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य के सबसे गरीब परिवारों की मदद के लिए ‘मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना ‘ की घोषणा की है। सरकार ने ऐसे करीब एक लाख परिवारों की पहचान की है जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हैं। इन परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी और पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की मासिक सहायता मिलेगी। साथ ही, जिन परिवारों के पास पक्के मकान नहीं हैं (जिनकी संख्या करीब 27 हजार)  , उन्हें चरणबद्ध तरीके से घर बनाकर दिए जाएंगे।

-मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जल्द ही पंचायत सचिवों के 150 पदों पर भर्ती की जाएगी, साथ ही पंचायत चौकीदारों के पद भी बारी-बारी से भरे जाएंगे। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 500 ई-टैक्सी की खरीद पर सरकार 50% की भारी छूट देगी, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके अलावा, ई-टैक्सी के मासिक किराए में 5 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 20 से 30 कमरों वाले नए होटलों के लोन पर 4 से 5 प्रतिशत की सब्सिडी देगी और महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘सोलो शी ट्रैवलर’ पॉलिसी शुरू की जाएगी। साथ ही, अब राज्य में दुकानों को 24 घंटे खुला रखने की अनुमति होगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्वयं सहायता समूहों को 150 करोड़ रुपये का कर्ज देने का भी लक्ष्य रखा गया है।

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